‘अब पाइप से हॉकी खेल रहे हैं बच्चे’, मेडल के बाद आए बदलाव पर क्या बोले श्रीजेश-मनप्रीत?

टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वाले हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह और गोलकीपर श्रीजेश ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कई दिलचस्प किस्से बताए. साथ ही पेरिस ओलंपिक के लिए तैयारियों का भी ज़िक्र किया.

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भारतीय टीम के गोलकीपर श्रीजेश (Photo Credit:  Chandradeep Kumar) भारतीय टीम के गोलकीपर श्रीजेश (Photo Credit: Chandradeep Kumar)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 3:28 PM IST
  • इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में हॉकी टीम के सितारे
  • मनप्रीत सिंह, श्रीजेश ने सुनाए किस्से

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021 के मंच पर शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में भारत का नाम रोशन करने वाले हॉकी टीम के सितारे आए. भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह और ‘द वॉल’ का खिताब ले चुके गोलकीपर श्रीजेश ने इस दौरान अपने अनुभवों को साझा किया. 

ब्रॉन्ज मेडल वाले मैच में जब एन मौके पर पेनॉल्टी कॉर्नर आया, उस लम्हे को लेकर श्रीजेश ने बताया कि जब क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर आउट होते तो हम टीवी बंद कर देते थे, ऐसा ही तब भी हुआ. जब पेनाल्टी कॉर्नर आया तो डर था कि अब क्या होगा. तब कुछ सोचने का वक्त नहीं था. बस यही दिमाग में था कि 21 साल से मेहनत कर रहा हूं, तब सोचा कि बस यही गोल सेफ करना था. 

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श्रीजेश ने बताया, ‘केरल में अब लोग पाइप से हॉकी खेल रहे हैं, ये सबसे बड़ा बदलाव है. केरल में क्योंकि फुटबॉल, वॉलीबॉल ही सबसे ऊपर है. क्योंकि नई जेनरेशन के सामने हम नया मेडल लाए हैं, तो ये अच्छा इंस्पीरेशन हुआ.’ 

टीम में पंजाबी प्लेयर्स के होने को लेकर श्रीजेश ने कहा कि ये लोग बस पंजाबी गाने बजाते हैं, प्रैक्टिस के दौरान सिर्फ पंजाबी गाने चलते रहते. कप्तान मनप्रीत सिंह ने बताया कि टीम के प्लेयर्स ने श्रीजेश का नाम श्रीजेंदर सिंह रखा हुआ है. 

जब श्रीजेश से सवाल हुआ कि क्या आप पेरिस ओलंपिक जा रहे हो? तब उन्होंने कहा कि कोई प्लेयर नहीं चाहता है कि वो ना खेले, जबतक ये लोग लात नहीं मारते हैं तबतक तो रहूंगा मैं. वहीं, इसीपर कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा कि हमारी ओर से श्रीजेश भाई जा रहे हैं, पेरिस तक उनकी फिटनेस कैसी रहती है ये भी देखना होगा. 

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मेडल जीतने वाली हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने बताया कि पेनाल्टी कॉर्नर के वक्त हमें श्रीजेश पर विश्वास था क्योंकि उन्हें ऐसे पलों का अनुभव है. 2012 का ओलंपिक हमारे लिए एक बुरा सपना था, 2016 में हम लोग क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे थे लेकिन इस बार टीम में बहुत ज्यादा विश्वास था. 

मनप्रीत ने बताया कि अबकी बार जब हम वापस आए तो हमें इतना प्यार मिला, जिससे विश्वास नहीं हुआ. मेरे परिवार का सपना था मेडल जीतने का, पिता की जब मौत हुई तब भी वह यही चाहते थे कि मनप्रीत मेडल जीत जाए. 


 

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