Bronco Test: यो-यो के बाद अब आया ब्रोंको टेस्ट... भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर सीरियस हुआ BCCI

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को अब ब्रोंको टेस्ट से गुजरना होगा. भारतीय टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रॉक्स ने ब्रोंको टेस्ट का सुझाव दिया था. हेड कोच गौतम गंभीर की भी इसे लेकर सहमति थी.

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भारतीय खिलाड़ियों को अब ब्रोंको टेस्ट से गुजरना होगा (Photo: Getty Images) भारतीय खिलाड़ियों को अब ब्रोंको टेस्ट से गुजरना होगा (Photo: Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST

भारतीय क्रिकेट टीम ने हाल ही में इंग्लैंड का दौरा किया था, जहां उसने मेजबान  टीम के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में हिस्सा लिया. यह टेस्ट सीरीज काफी रोमांचक रही और 2-2 से बराबरी पर छूटी. भारतीय टीम इस सीरीज को जीत भी सकती थी, लेकिन लचर फील्डिंग के चलते उसने ये मौका गंवा दिया. लीड्स टेस्ट मैच के दौरान तो भारतीय खिलाड़ियों ने खूब कैच टपकाए थे, जिसके कारण इंग्लैंड ने बड़ा टारगेट चेज कर लिया.

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अब भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इंग्लैंड दौरे के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस को जांचने के लिए एक नया टेस्ट शुरू किया है, जिसे ब्रोंको टेस्ट (Bronco Test) कहा जाता है. यह टेस्ट भारतीय खिलाड़ी बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में देंगे. इस टेस्ट का उद्देश्य खिलाड़ियों खासकर तेज गेंदबाजों की फिटनेस में सुधार करना है.

इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में कई भारतीय खिलाड़ी फिटनेस के मामले में संघर्ष करते नजर आए. आकाश दीप और प्रसिद्ध कृष्णा की फिटनेस सवालों के घेरे में रही. आकाश तो चोटिल होने के चलते लॉर्ड्स टेस्ट मैच में नहीं खेल पाए. जबकि जसप्रीत बुमराह वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते केवल तीन टेस्ट खेले. तेज गेंदबाजों में सिर्फ मोहम्मद सिराज सभी पांच टेस्ट खेल पाए. इन सबको देखते हुए फिटनेस के नए मानक तय करने का फैसला लिया गया.

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इस शख्स ने की थी ब्रोंको टेस्ट की सिफारिश
भारतीय टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रॉक्स ने ब्रोंको टेस्ट का सुझाव दिया था. हेड कोच गौतम गंभीर की भी इसे लेकर सहमति थी. एड्रियन ले रॉक्स का मानना है कि खिलाड़ियों को जिम पर जरूरत से अधिक ध्यान देने के बजाय ज्यादा रनिंग करने पर फोकस रखना चाहिए.

जसप्रीत बुमराह, फोटो: (Getty Images)

एक सूत्र ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'ब्रोंको टेस्ट बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शुरू किया गया है. सेंट्रल कॉनट्रैक्ट में शामिल कुछ खिलाड़ी बेंगलुरु आकर यह टेस्ट दे चुके हैं. ब्रोंको टेस्ट का इस्तेमाल इसलिए शुरू किया गया है ताकि फिटनेस का स्टैंडर्ड और हाई हो सके. यह भी देखा जा रहा था कि भारतीय क्रिकेटर खासकर तेज गेंदबाज ज्यादा रनिंग नहीं कर रहे थे और जिम में काफी समय बिता रहे थे. खिलाड़ियों को बताया गया है कि उन्हें अब ज्यादा रनिंग करनी होगी.'

क्या होता है ब्रोंको टेस्ट?
ब्रोंको टेस्ट में खिलाड़ी को पहले 20 मीटर की शटल रन करनी होती है. इसके बाद 40 मीटर और 60 मीटर की रनिंग करनी होती है. इन तीनों को मिलाकर एक सेट बनता है. खिलाड़ी को ऐसे पांच सेट बिना रुके हुए पूरे करने होंगे. भारतीय खिलाड़ियों को यह टेस्ट 6 मिनट के भीतर पूरा करना होगा, जिसमें वे करीब 1200 मीटर की दूरी तय करेंगे.

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भारतीय टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस जांचने के लिए पहले से यो-यो टेस्ट और 2 किमी टाइम ट्रायल मौजूद है. 2 किमी के टाइम ट्रायल में तेज गेंदबाजों के लिए मानकर 8 मिनट 15 सेकंड रखा जाता है, जबकि बाकी खिलाड़ियों के लिए ये मानकर 8 मिनट 30 सेकंड है. अब भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस का मूल्यांकन यो-यो टेस्ट, 2 किमी टाइम ट्रायल के अलावा ब्रोंको टेस्ट के जरिए होगा...

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