टी20 क्रिकेट का दौर लगातार बदल रहा है. आईपीएल के हर सीजन में कोई न कोई नया प्रयोग सामने आता है- कभी गेंदबाजों के रोल में बदलाव, कभी बल्लेबाजी क्रम में. इसी कड़ी में अब ऋषभ पंत को ओपनिंग में उतारने का विचार चर्चा में है. दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने भी इस आइडिया का समर्थन करते हुए कहा कि पंत शुरुआती ओवरों में गेंदबाजों को चौंका सकते हैं.
यह बात सुनने में आकर्षक लगती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक दिलचस्प आइडिया है, या वास्तव में एक ठोस क्रिकेटिंग रणनीति भी?
आईपीएल-2026 के अपने पहले मैच में 1 अप्रैल को लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए पारी का आगाज करने खुद कप्तान ऋषभ पंत आ गए थे. और तब से यह बहस का मुद्दा बन गया कि पंत को क्या यह प्रयोग करना चाहिए था? इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने ऋषभ पंत को टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में लेकर सवाल खड़े किए हैं. पीटरसन का कहना है कि पंत को खुद पर अतिरिक्त दबाव डालने की बजाय अपने खेल का आनंद लेना चाहिए.
सरप्राइज फैक्टर- क्या यही सबसे बड़ा कारण है?
पंत को ओपनिंग में भेजने की सबसे बड़ी वजह यही बताई जा रही है कि वह गेंदबाजों को चौंका सकते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि पंत का खेलने का तरीका अलग है और वह पारंपरिक बल्लेबाजों जैसे नहीं है.
- वह पहली ही गेंद पर बड़ा शॉट खेलने से नहीं हिचकते
- रिवर्स स्वीप, स्कूप और डाउन-द-ट्रैक जैसे शॉट्स उनके हथियार हैं
- सबसे अहम- वह गेंदबाज की प्लानिंग को जल्दी बिगाड़ देते हैं
पावरप्ले में, जब फील्डिंग प्रतिबंध होते हैं, यह स्टाइल और भी खतरनाक हो सकता है. अगर पंत 15-20 गेंदें टिक जाते हैं, तो मैच का मोमेंटम पूरी तरह बदल सकता है.
... यहीं एक बड़ा 'लेकिन' भी है, वही स्टाइल, सबसे बड़ा खतरा
पंत का अनिश्चित (अनप्रेडिक्टेबल) खेल उन्हें खास बनाता है, लेकिन ओपनिंग में यही टीम के लिए परेशानी बन सकता है.
ओपनिंग बल्लेबाज का काम सिर्फ रन बनाना नहीं होता, बल्कि -
- नई गेंद को संभालना
- शुरुआत की स्विंग को समझना
- टीम को मजबूत शुरुआत देना भी जरूरी होता है
पंत का नेचुरल गेम इन तीनों बातों से अलग है. वह 'सेट' होने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि खेल को तुरंत बदलने की कोशिश करते हैं.
ऐसे में अगर वह जल्दी आउट होते हैं, जो कि उनके खेल का हिस्सा भी है- तो टीम पावरप्ले में ही दबाव में आ सकती है. टी20 में 19/1, 48/2, 49/3 की शुरुआत अक्सर मैच को मुश्किल बना देती है. जैसा कि इस मुकाबले में हुआ. ओपनर पंत 9 गेंदों में 7 रन बनाकर नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट हो गए थे, जिसके बाद टीम लड़खड़ाई और 18.4 ओवरों में 141 रनों पर सिमट गई.
टीम कॉम्बिनेशन पर बड़ा असर
पंत को ओपनिंग भेजना सिर्फ एक बल्लेबाज का रोल बदलना नहीं है, बल्कि यह पूरे बैटिंग यूनिट की संरचना बदल देता है.
अगर वह ओपन करते हैं, तो-
- मिडिल ऑर्डर को ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी
- टीम को एक मजबूत एंकर की जरूरत होगी
- सबसे अहम- टीम को मानसिक रूप से तैयार रहना होगा कि शुरुआत खराब हो सकती है
आजकल अक्सर यह कहा जाता है कि टी20 में 'इम्पैक्ट ओपनर्स' का दौर है. उदाहरण दिए जाते हैं-
टी20 में नए प्रयोग कोई नई बात नहीं है. सुनील नरेन जैसे खिलाड़ी को भी ओपनिंग में उतारा गया और उन्होंने पावरप्ले में तेजी से रन बनाकर टीम को जबरदस्त शुरुआत दी है.
लेकिन इस उदाहरण को सीधे पंत पर लागू करना जल्दबाजी माना जाएगा. पंत अक्सर परिस्थिति को नजरअंदाज कर अपने तरीके से खेलते हैं. यही फर्क उन्हें खास भी बनाता है, और जोखिम भरा भी.
क्या यह रणनीतिक फैसला है या ‘इमोशनल कॉल’?
कई बार टीम मैनेजमेंट किसी खिलाड़ी की क्षमता को देखते हुए प्रयोग करता है. पंत के मामले में भी यही हो रहा है. वह मैच विनर हैं, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन सवाल यह है कि...
- क्या टीम ने यह फैसला सोच-समझकर लिया है,
- या फिर सिर्फ असर दिखाने की उम्मीद में उठाया गया कदम है?
अगर यह सिर्फ इस सोच पर आधारित है कि 'पंत कुछ अलग कर सकते हैं', तो यह थोड़ा अधूरा तर्क लगता है.
रणनीति हमेशा कंसिस्टेंसी (consistency) को ध्यान में रखकर बनती है, सिर्फ इम्पैक्ट के लिए नहीं.
पंत को ओपनिंग में भेजना एक ऐसा फैसला है जो मैच को दो हिस्सों में बांट सकता है.
- अगर यह चल गए, तो पावरप्ले में ही मैच खत्म हो सकता है
- अगर यह नहीं चले, तो टीम शुरुआत में ही बैकफुट पर आ जाएगी
यह फैसला तभी सही है, जब टीम पूरी तरह इस जोखिम को स्वीकार करे. पंत को ओपनिंग देना 'सेफ' क्रिकेट नहीं है- यह एक आक्रामक, साहसी और थोड़ा अनिश्चित कदम है.
...और अंत में, यही कहना सही होगा- पंत ओपनिंग में गेम चेंजर बन सकते हैं, लेकिन हर गेम में नहीं. यानी, यह आइडिया जितना रोमांचक है, उतना ही अस्थिर भी. अब फैसला टीम का है कि वह रोमांच चुनती है या स्थिरता.
विश्व मोहन मिश्र