पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के 11वें सीजन की शुरुआत 26 मार्च से हो रही है. नए सीजन की शुरुआत से पहले ही यह लीग बड़े विवाद और सुरक्षा चिंताओं में घिरती नजर आ रही है. जहां एक तरफ तेल संकट और विदेशी खिलाड़ियों के टूर्नामेंट छोड़कर जाने के फैसले ने पीएसएल की चमक को फीका किया है, वहीं अब एक नए खतरे ने हालात को और गंभीर बना दिया है.
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े गुट जमात-उल-अहरार (JuA) ने लाहौर और कराची में होने वाले पीएसएल मैचों को लेकर धमकी भरा बयान जारी किया है. इस बयान में खासतौर पर विदेशी खिलाड़ियों को चेतावनी दी गई है कि वे टूर्नामेंट से हट जाएं, क्योंकि मौजूदा सुरक्षा हालात बेहद खतरनाक बताए गए हैं.
टूर्नामेंट से दूर होंगे विदेशी खिलाड़ी?
जमात-उल-अहरार के बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान में मौजूदा हालात ऐसे हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय (विदेशी) खिलाड़ियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती. ऐसे में खिलाड़ियों को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान सुपर लीग से दूरी बनाने की सलाह दी गई है.
जमात-उल-अहरार के बयान में ये भी बताया गया कि पाकिस्तान में हालात बहुत खराब हैं, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में. संगठन का दावा है कि वहां फौजी कार्रवाई और हिंसा से लोग परेशान हैं और कई लोग मारे जा रहे हैं या लापता हैं.
संगठन ने कहा कि जब देश के कुछ हिस्सों में लोग परेशानियां झेल रहे हैं, तब क्रिकेट मैच कराना 'घाव पर नमक छिड़कने' जैसा है. जमात-उल-अहरार पहले भी कई बड़े आतंकी हमलों, खासकर सुसाइड ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार रहा है. ऐसे में इस तरह की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इससे पीएसएल के आयोजन पर सवाल खड़े हो गए हैं.
अब क्या रद्द होगा पीएसएल 2026?
गौरतलब है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पहले ही तेल-गैस संकट का हवाला देते हुए पीएएसएल 2026 को सीमित कर चुका है. टूर्नामेंट को छह की बजाय सिर्फ दो वेन्यू तक सीमित किया गया है, ओपनिंग सेरेमनी रद्द कर दी गई और मुकाबले बिना दर्शकों के कराने का फैसला लिया गया है. अब जमात-उल-अहरार की धमकी के बाद पीसीबी की टेंशन बढ़ गई है.
इसी बीच इंडियन प्रीमियर लीग के शेड्यूल से टकराव और ज्यादा कमाई के चलते कई विदेशी खिलाड़ी पीएसएल से दूरी बना रहे हैं, जिससे लीग की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है. ऐसे में पीएसएल 2026 अब सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि सुरक्षा, आर्थिक दबाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच घिरा एक बड़ा इवेंट बन गया है. अब देखना होगा कि इन हालात में टूर्नामेंट सुरक्षित और सफल तरीके से आयोजित हो पाता है या नहीं.
अरविंद ओझा / सुबोध कुमार