इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में अंपायरिंग के फैसलों को लेकर नई बहस छिड़ गई है. दो अलग-अलग मैचों में ग्लव्स बदलने को लेकर दो अलग फैसले देखने को मिले. एक ओर हार्दिक पंड्या को बिना किसी रोक-टोक के ग्लव्स बदलने की अनुमति मिल गई, वहीं दूसरी ओर ट्रिस्टन स्टब्स को इसी तरह की मांग पर मना कर दिया गया.
रविवार (12 अप्रैल) को मुंबई इंडियंस (MI) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के मुकाबले में हार्दिक पंड्या को दो बार ग्लव्स बदलते देखा गया. यह बदलाव ओवर खत्म होने के बाद नहीं, बल्कि ओवर के बीच में किया गया था. हालांकि अंपायर्स ने इसे लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई. सब कुछ सामान्य तरीके से हुआ और मैच बिना किसी विवाद के आगे बढ़ता रहा.
लेकिन इसके ठीक एक दिन पहले दिल्ली कैपिटल्स (DC) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के मैच में मामला उल्टा नजर आया. दिल्ली कैपिटल्स के बल्लेबाज ट्रिस्टन स्टब्स ने पसीने की वजह से ग्रिप खराब होने की शिकायत करते हुए ओवर के बीच में ग्लव्स बदलने की अनुमति मांगी थी.
अंपायर से भिड़ गए थे नीतीश राणा
हालांकि, अंपायर्स ने नियमों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया. इस दौरान नीतीश राणा ने अंपायरों के फैसले पर सवाल उठाया और मैदान पर बहस भी देखने को मिली. मामला इतना बढ़ गया कि बाद में नीतीश पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और एक डिमेरिट पॉइंट खाते में जोड़ा गया.
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नियमों के मुताबिक खिलाड़ी दो ओवर के बीच में या ब्रेक के दौरान ग्लव्स बदल सकते हैं. मिड-ओवर बदलाव सिर्फ तभी संभव है जब उपकरण खराब हो या सुरक्षा से जुड़ा मामला हो. वैसे पूरे विवाद की असली वजह टाइमिंग नहीं, बल्कि दोनों घटनाओं का कम समय में होना है. पहले से ही ट्रिस्टन स्टब्स और नीतीश राणा वाले मामले ने माहौल गर्म कर दिया था. अब अगले ही मैच में हार्दिक को मिली अनुमति ने इस बहस को और हवा दे दी.
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कई फैन्स को यह' डबल स्टैंडर्ड' लगा. इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आईपीएल 2026 में अब हर छोटा फैसला भी गहन जांच के दायरे में है. अंपायर्स पर दबाव बढ़ेगा कि वे हर स्थिति में नियमों को एकसमान और स्पष्ट तरीके से लागू करें. फिलहाल, यह मामला सिर्फ ग्लव्स बदलने तक सीमित नहीं है, यह आईपीएल में नियमों की व्याख्या और पारदर्शिता पर उठते सवालों का संकेत बन चुका है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क