टी20 क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी आंकड़ों से बड़े होते हैं. वे उन पलों से पहचाने जाते हैं जब मैच सांस रोक देता है और एक छोटी-सी गलती भी पूरी कहानी बदल सकती है. भारतीय टीम के लिए ऐसे क्षणों में अक्सर एक ही चेहरा दिखाई देता है और सिर्फ और सिर्फ हार्दिक पंड्या का चेहरा.
एक दशक पहले बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में आखिरी ओवर फेंकने वाले हार्दिक ही थे. दो साल पहले बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल में टी20 वर्ल्ड कप फाइनल का आखिरी ओवर भी उनके हाथ में था... और वानखेड़े में इंग्लैंड के खिलाफ इस बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल की रात 19वां ओवर भी उन्होंने ही फेंका.
यह सिर्फ संयोग नहीं है. यह उस भरोसे की कहानी है जो भारतीय टीम ने पिछले दस साल में इस ऑलराउंडर पर बनाया है.
चिन्नास्वामी 2016: जहां पहली बार दिखा ‘नर्व्स ऑफ स्टील’
टी20 वर्ल्ड कप 2016 में बांग्लादेश के खिलाफ वह मुकाबला भारतीय क्रिकेट के सबसे रोमांचक मैचों में गिना जाता है.
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 146 रन बनाए थे. लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं था और बांग्लादेश आखिरी ओवर तक मुकाबले में बना रहा. अंतिम छह गेंदों में उन्हें जीत के लिए 11 रन चाहिए थे और क्रीज पर मुश्फिकुर रहीम और महमूदुल्लाह जैसे अनुभवी बल्लेबाज मौजूद थे.
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने गेंद हार्दिक पंड्या को थमा दी.
पहली गेंद पर सिंगल आया. इसके बाद मुश्फिकुर रहीम ने दो चौके जड़ दिए और बांग्लादेश की जीत लगभग तय नजर आने लगी. मुश्फिकुर ने जश्न भी शुरू कर दिया था,
लेकिन हार्दिक ने अगली ही गेंद पर उन्हें कैच करा दिया. फिर अगली गेंद पर महमूदुल्लाह भी आउट हो गए.
अब आखिरी गेंद पर बांग्लादेश को जीत के लिए 2 रन चाहिए थे. बल्लेबाज शॉट नहीं खेल पाए और बाय के लिए दौड़ पड़े.
तभी धोनी ने गेंद फेंकने की बजाय खुद दौड़कर स्टंप तोड़ दिए और मुस्ताफिजुर रहमान को रन आउट कर दिया. मामला बहुत करीबी था, इसलिए फैसला करने के लिए तीसरे अंपायर को बुलाया गया. रिप्ले देखने के बाद रन आउट दिया गया और भारत 1 रन से जीत गया.
उस रात हार्दिक पंड्या ने दो गेंदों में मैच पलट दिया. यह वह पल था जब भारतीय टीम को पहली बार महसूस हुआ कि यह युवा ऑलराउंडर दबाव में टूटता नहीं है.
केंसिंग्टन ओवल 2024: जब उसी हाथ ने वर्ल्ड कप थमाया
आठ साल बाद मंच और बड़ा था- टी20 विश्व कप का फाइनल.
बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 176 रन बनाए. विराट कोहली ने 76 रनों की अहम पारी खेली और अक्षर पटेल ने 47 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया.
लेकिन दक्षिण अफ्रीका के हेनरिक क्लासेन ने मैच की दिशा बदल दी. कुछ ओवरों के भीतर ही मुकाबला भारत की पकड़ से फिसलता दिखने लगा.
जब आखिरी ओवर शुरू हुआ तो दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 16 रन चाहिए थे.
गेंद फिर हार्दिक पंड्या के हाथ में थी.
उन्होंने दबाव के उस क्षण में बेहतरीन गेंदबाजी की. सटीक लाइन-लेंथ और चतुराई भरी गेंदों से उन्होंने दक्षिण अफ्रीका को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया. मैच खत्म हुआ तो स्कोरबोर्ड पर दक्षिण अफ्रीका 169/8 पर रुक चुका था.
भारत 7 रनों से जीत गया और 11 साल बाद आईसीसी ट्रॉफी उसके हाथ में थी.
उस रात आखिरी ओवर सिर्फ गेंदबाजी नहीं था- वह भारतीय क्रिकेट के लंबे इंतजार का अंत था.
वानखेड़े 2026: हर जगह मौजूद ऑलराउंडर
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी हार्दिक का असर हर जगह दिखाई दिया.
पहले उन्होंने नई गेंद से फिल सॉल्ट को आउटस्विंगर पर आउट किया. फिर डेथ ओवर में आकर महत्वपूर्ण ओवर फेंका. उन्होंने 19वें ओवर में सिर्फ 9 रन दिए और सैम करन का विकेट भी निकाला. इसके बाद इंग्लिश बल्लेबाजों को आखिरी ओवर में 30 रन बनाने की चुनौती मिली. आखिरकार इस चैलंज को इंग्लैंड पार कर नहीं सका और भारत 7 रन से मैच जीतकर फाइनल में पहुंचा.
इससे पहले हार्दिक ने बल्ले से 12 गेंदों में 27 रन बनाकर भारत के स्कोर को 250 के पार पहुंचाने में मदद की.
और फील्डिंग में भी निर्णायक भूमिका निभाई- लॉन्ग ऑफ पर दौड़ते हुए गेंद रोककर सटीक थ्रो किया, जिससे इंग्लैंड पर दबाव और बढ़ गया.
उस रात उन्होंने भारत की जीत में बल्ले, गेंद और फील्डिंग- तीनों से योगदान दिया.
लैब में बनाओ तो भी शायद ऐसा खिलाड़ी न बने ...
अगर किसी प्रयोगशाला में बैठकर एक सीम गेंदबाजी करने वाला आदर्श व्हाइट-बॉल ऑलराउंडर तैयार करना हो, तो उसमें कई गुण चाहिए- नई गेंद से उपयोगी गेंदबाजी, डेथ ओवरों में साहस, तेज रन बनाने की क्षमता, फुर्तीली फील्डिंग और बड़े मैचों में दबाव झेलने का मिजाज. भारतीय टीम के पास पिछले एक दशक से इन सभी गुणों का जीता-जागता संस्करण मौजूद है. चिन्नास्वामी 2016 से लेकर केंसिंग्टन ओवल 2024 और वानखेड़े 2026 तक कहानी बार-बार वही कहती है-
... जब मैच की सांसें तेज हो जाती हैं, जब मैदान पर सबसे कठिन पल आता है, तब भारतीय टीम अक्सर जिस खिलाड़ी की ओर देखती है, वह है - हार्दिक पंड्या- बिग मैच का असली बॉस.
विश्व मोहन मिश्र