एक समय था जब IPL में टीमें बड़े स्कोर बनाकर डर पैदा करती थीं. अब गुजरात टाइटन्स ने साबित कर दिया है कि डर सिर्फ बल्लेबाजी से नहीं… गेंदबाजी से भी पैदा होता है. गुरुवार को अहमदाबाद में चेन्नई सुपर किंग्स पर 89 रनों की जीत सिर्फ दो अंक नहीं थी, बल्कि पूरे टूर्नामेंट के लिए एक चेतावनी थी- अगर ट्रॉफी जीतनी है, तो पहले गुजरात टाइटन्स की इस निर्दयी मशीन को रोकना होगा.
सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन और कप्तान शुभमन गिल ने पहले शतकीय साझेदारी कर मैच की नींव रखी. फिर गेंद हाथ में आते ही मोहम्मद सिराज और राशिद खान ने चेन्नई की बल्लेबाजी को ऐसे तोड़ा जैसे यह कोई प्लेऑफ मुकाबला नहीं, नेट प्रैक्टिस हो.
14 मैचों में 18 अंकों के साथ गुजरात टाइटन्स ने टॉप-2 में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. इसका मतलब साफ है- धर्मशाला में क्वालिफायर-1 जीतते ही टीम सीधे फाइनल में पहुंच सकती है. और सबसे खतरनाक बात? फाइनल अहमदाबाद में होना है… वही मैदान जो अब GT का किला बन चुका है.
अहमदाबाद… जहां GT विरोधियों का दम घोंट देती है
इस सीजन गुजरात लगातार चार मैच अहमदाबाद में जीत चुकी है. लेकिन यह सिर्फ जीत नहीं है. यह विपक्षी बल्लेबाजों की मानसिक टूटन की कहानी है.
यह वही मॉडल है जो कभी चेन्नई सुपर किंग्स ने चेपॉक में बनाया था. फर्क सिर्फ इतना है कि वहां स्पिन का जाल था… यहां तेज गेंदबाजी का आतंक है.
GT की गेंदबाजी देखकर ऐसा लगता है जैसे टीम मीटिंग में सिर्फ एक लाइन बोली जाती होगी- 'स्टंप बाद में देखना… पहले बल्लेबाज को असहज करो.'
सिराज-रबाडा की जोड़ी… बल्लेबाजों के लिए बुरा सपना
नई गेंद से सिराज और कगिसो रबाडा जब दौड़ते हैं, तो बल्लेबाज रन कम और बचने के रास्ते ज्यादा सोचता है. सिराज की स्विंग, रबाडा की रफ्तार, जेसन होल्डर की अतिरिक्त उछाल और प्रसिंद्ध की हार्ड लेंथ… यह हमला किसी भी बल्लेबाजी क्रम को सांस लेने तक का मौका नहीं देता.
सिराज लगातार 140 किमी प्रति घंटे से ऊपर की रफ्तार पर गेंद डाल रहे हैं. गेंद स्विंग भी कर रही है और सीम भी. दूसरी तरफ रबाडा लगभग 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर बल्लेबाजों के शरीर और दिमाग दोनों पर हमला बोल रहे हैं.
फिर जब बल्लेबाज सोचता है कि अब स्पिन आएगी और थोड़ी राहत मिलेगी… तब सामने आते हैं राशिद खान.
दुनिया के सबसे खतरनाक T20 स्पिनरों में गिने जाने वाले राशिद बल्लेबाजों को रन नहीं, सिर्फ गलती करने का इंतजार देते हैं.
आशीष नेहरा ने बनाई तेज गेंदबाजों की फैक्ट्री
आशीष नेहरा की सबसे बड़ी ताकत यही है कि उन्होंने GT को सिर्फ एक टीम नहीं रहने दिया. उन्होंने इसे एक तेज गेंदबाजी सिस्टम बना दिया है. बाकी टीमें जहां 'एंटरटेनमेंट क्रिकेट' खेल रही हैं, वहीं नेहरा की GT क्रिकेट को उसकी सबसे पुरानी सच्चाई याद दिला रही है- तेज गेंदबाजी आज भी बल्लेबाज का सबसे बड़ा डर है.
GT की खासियत सिर्फ घरेलू मैदान पर जीतना नहीं है. टीम बाहर भी उसी निर्दयता से मैच जीत रही है. यानी यह कोई 'होम पिच फ्रॉड; नहीं… बल्कि पूरी क्रिकेट फिलॉसफी है.
अहमदाबाद की पिच… GT का सबसे बड़ा हथियार
इस IPL में अहमदाबाद तेज गेंदबाजों के लिए सबसे मददगार मैदान बन चुका है. सीम मूवमेंट, अतिरिक्त उछाल और हार्ड लेंथ यहां बल्लेबाजों को खुलकर खेलने नहीं देती.
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच इसका सबसे बड़ा उदाहरण था. GT ने सिर्फ 168 रन बनाए थे. T20 क्रिकेट में यह स्कोर सामान्य माना जाता है.. लेकिन जैसे ही गुजरात के गेंदबाज आए, मैच अचानक 220 रन वाले दबाव में बदल गया. SRH 86 रनों पर लुढ़क गई.
यही वजह है कि जैसे ही पिच में सीम मूवमेंट और उछाल आती है, गुजरात टाइटन्स अचानक IPL की सबसे खतरनाक टीम बन जाती है.
अब सिर्फ दो जीत दूर है ट्रॉफी
यह फ्रेंचाइजी अभी सिर्फ अपने पांचवें सीजन में है. पहले सीजन में चैम्पियन… दूसरे में रनर-अप… और अब फिर से ट्रॉफी की ओर बढ़ रही. समीकरण बेहद आसान है- अगर GT क्वालिफायर-1 जीत जाती है, तो फाइनल अहमदाबाद में होगा.. और फिलहाल IPL 2026 में ऐसा कोई नहीं दिख रहा जो अहमदाबाद में इस टीम को रोक सके.
विश्व मोहन मिश्र