विजय हजारे ट्रॉपी में देवदत्त पडिक्कल का बल्ला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. सोमवार, 12 जनवरी को देवदत्त ने अपना नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज करा लिया, जब कर्नाटक ने मुंबई को हराकर विजय हजारे ट्रॉफी के सेमीफाइनल में जगह बनाई. पडिक्कल एक से ज्यादा सीज़न में 700 रन बनाने वाले टूर्नामेंट के पहले बल्लेबाज़ बन गए हैं. अब तक सिर्फ पांच बल्लेबाज़- मयंक अग्रवाल, पृथ्वी शॉ, देवदत्त पडिक्कल, नारायण जगदीशन और करुण नायर ही ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने एक सीज़न में 700 से ज्यादा रन बना पाए थे, लेकिन पडिक्कल ने यह उपलब्धि दूसरी बार हासिल कर इतिहास रच दिया.
देवदत्त पडिक्कल का विजय हजारे में बल्ला आग उगल रहा है. उन्होंने अबतक खेले गए 8 मैच में 4 शतक और दो अर्धशतक लगाए हैं.
क्वार्टर फाइनल में हासिल किया मुकाम
2025-26 सीजन में इस मुकाम तक पहुंचने के लिए पडिक्कल को क्वार्टरफाइनल मुकाबले में 60 रनों की जरूरत थी. बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड-1 पर खेले गए मैच में उन्होंने कर्नाटक की पारी के 24वें ओवर में, शम्स मुलानी की गेंद पर यह उपलब्धि हासिल की. इस दौरान उनके साथी खिलाड़ियों और दर्शकों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया.
कर्नाटक को इस मुकाबले में बारिश और खराब रोशनी के कारण 55 रनों से विजेता घोषित किया गया. वीजेडी (VJD) मेथड के तहत कर्नाटक को जीत मिली. मैच रोके जाने के समय कर्नाटक 33 ओवर में 1 विकेट पर 187 रन बना चुका था और मुंबई के 255 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहा था.
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पडिक्कल ने बनाए नाबाद 81 रन
पडिक्कल 95 गेंदों पर 81 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि करुण नायर ने 80 गेंदों पर 74 रन की नाबाद पारी खेली. दोनों के बीच हुई अटूट साझेदारी ने कर्नाटक को जरूरी रन रेट से काफी आगे पहुंचा दिया था, जिससे नतीजे को लेकर कोई संदेह नहीं बचा.
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ऐसा रहा ये मुकाबला
इससे पहले कर्नाटक ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया और मुंबई को 8 विकेट पर 254 रनों पर रोक दिया. गेंदबाज़ी में विध्याधर पाटिल सबसे सफल रहे, जिन्होंने तीन विकेट झटके. मुंबई की ओर से शम्स मुलानी अकेले चमकदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी रहे. उन्होंने 91 गेंदों पर 86 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाज़ों से उन्हें खास सहयोग नहीं मिला.
जवाब में कर्नाटक की ओर से मयंक अग्रवाल और देवदत्त पडिक्कल ने पारी की शुरुआत की. मयंक अग्रवाल 12 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए, लेकिन इसके बाद पडिक्कल और करुण नायर ने कोई और विकेट गिरने नहीं दिया. दोनों के संयमित अर्धशतकों ने कर्नाटक को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया, इससे पहले कि मैच को रोकना पड़ा.
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