बीस नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश को स्वीकार करते हुए सौ मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली रेंज मान्यता दी. इस फैसले के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. पर्यावरणविद और विपक्षी दल इस फैसले से चिंतित हैं क्योंकि सौ मीटर की परिभाषा से छोटी पहाड़ियों में खनन संभव हो सकता है, जो अरावली के विनाश का कारण बन सकता है. हालांकि केंद्र सरकार ने कहा कि इस परिभाषा को लेकर गलतफहमी फैलाई जा रही है. पर्यावरण मंत्री ने बताया कि सौ मीटर का अर्थ टॉप से नीचे का लैंडफॉर्म है, जो अरावली के चार जोन को ध्यान में रखता है. यह परिभाषा इसलिए बनाई गई ताकि अवैध खनन को रोका जा सके. राजस्थान में कांग्रेस के दौर में अवैध खनन बढ़ा था. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक कमेटी बनाई थी। सरकार की सफाई के बावजूद विरोध जारी है. अब सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया है.