यूपी के मऊ के रहने वाले चतुरी गुप्ता करीब चालीस साल पहले पत्नी से नाराजगी के बाद घर छोड़कर चले गए थे. वे कानपुर में गुमनाम जीवन बिता रहे थे हाल ही में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पनकी के नारायणा मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया. सामाजिक कार्यकर्ता की मदद से उनके बेटों राजमंगल और राजू को सूचना दी गई. अस्पताल पहुंचने पर पहचान का संकट खड़ा हो गया क्योंकि लंबी अवधि और उम्र के असर के कारण बेटे अपने पिता को पहचान नहीं पा रहे थे. ऐसे में मां द्वारा दी गई दशकों पुरानी एक धुंधली तस्वीर उम्मीद की किरण बनी.