यह पूरा विवाद आशीष से शुरू होकर अविमुक्तेश्वरानंद तक पहुंचा है. ब्रजेश पाठक ने बटुको को बुलाकर उन्हें सम्मानित किया, जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद का रिएक्शन आया. उन्होंने कहा कि कम से कम कोई नेता सरकार में है जो सनातन धर्म और उसकी दार्शनिक पृष्ठभूमि को समझता है.