पंजाब में नशा खत्म करने के लिये केवल रैलियाँ और यात्राएँ करना पर्याप्त नहीं होगा. राज्य में करोड़ों रुपये यात्राओं पर खर्च किए जाते हैं जो कि जनता की राशि होती है. इससे बेहतर होता कि उन फंडों को रिहैबिलिटेशन केंद्रों पर लगाया जाता, जहाँ नशे से लड़ रहे व्यक्तियों को सहायता मिलती. रैलियाँ केवल दिखावे की होती हैं, जबकि स्थायी समाधान रिहैबिलिटेशन और शिक्षा में है.