Holi की शान गुजिया का इतिहास 13वीं सदी से जुड़ा माना जाता है. ‘गूंझा’ से लेकर तुर्की बकलावा के प्रभाव और बुंदेलखंड के शाही दरबार तक, समय के साथ इसका रूप बदलता गया. आज मावा, ड्राईफ्रूट्स और नए flavors के साथ यह पारंपरिक मिठाई हर राज्य में अलग अंदाज में मिलती है.