Apple में काम कर चुके राकेश ने जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बाद नया रास्ता चुना. कॉर्पोरेट छोड़ अब वे बेंगलुरु में इलेक्ट्रिक ऑटो चलाते हैं, साथ ही डांस और पेंटिंग में सक्रिय हैं. संघर्ष, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मखोज की उनकी कहानी प्रेरणा देती है.