अक्षय तृतीया का पर्व केवल सोना-चांदी खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक उन्नति का भी विशेष अवसर है. प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार इस दिन किया गया नामजप, मौन साधना और सादगीपूर्ण जीवन शैली व्यक्ति को भीतर से शुद्ध करती है. यदि भक्ति भाव से छोटे-छोटे उपाय अपनाए जाएं, तो यह दिन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और अक्षय पुण्य प्रदान कर सकता है.