वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इबोला वायरस को लेकर कई अहम जानकारियां दी. WHO ने बताया कि रविवार सुबह कांगो और युगांडा में इबोला महामारी को लेकर इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई. यह पहली बार है जब आपातकालीन समिति का गठन करने से पहले ही पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की गई है.
यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के अनुच्छेद 12 के तहत दोनों देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों से परामर्श करने के बाद उठाया गया. आज आपातकालीन समिति की बैठक बुलाई जाएगी.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक इटुरी से 30 मामले सामने आए हैं. युगांडा की राजधानी कंपाला में भी कुछ मामलों की पुष्टि हुई है.
WHO ने चेतावनी दी है कि संक्रमण और अधिक फैल सकता है. मौतों की संख्या बढ़ सकती है. 500 से अधिक संदिग्ध मामले और 130 संदिग्ध मौतों की जानकारी सामने आई है. ये आंकड़े आगे बदल सकते हैं. स्वास्थ्यकर्मियों की मौत की जानकारी भी मिली है.
इटुरी प्रांत में असुरक्षा का माहौल है. जहां जनसंख्या का आवागमन बहुत अधिक होता है. इसी कारण संक्रमण के और अधिक फैलने का खतरा बढ़ जाता है.
क्या है इबोला?
बता दें, इबोला एक खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है. यह कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना या वीर्य के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने के लिए जाना जाता है.
वहीं, WHO ने बताया है कि यह महामारी बंडिबुग्यो वायरस के कारण हुई है. यह इबोला वायरस की एक प्रजाति है, जिसके लिए कोई वैक्सीन या उपचार उपलब्ध नहीं है.
वैक्सीन उपलब्ध न होने की स्थिति में भी वायरस के फैलाव को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए देश कई अन्य कदम उठा सकते हैं. इनमें सही जानकारी देना और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना जैसे उपाय शामिल हैं.
स्नेहा मोरदानी