एक चौंकाने वाली घटना ने मेडिकल फील्ड को सोचने पर मजबूर कर दिया है. केंटकी के एंथनी थॉमस टीजे हूवर द्वितीय (TJ Hoover II) नाम के एक व्यक्ति को 2021 में ड्रग ओवरडोज के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था.
डॉक्टरों ने उनके ऑर्गन दान के लिए सर्जरी शुरू की लेकिन बीच में वह हिलने-डुलने और रोने लगा. सर्जरी रोक दी गई. टीजे जीवित बच गया, हालांकि अब उसे गंभीर दिमागी दिक्कत है. यह घटना अब मौत की परिभाषा, ब्रेन डेथ टेस्ट और ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर रही है.
क्या हुआ था टीजे के साथ?
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार अक्टूबर 2021 में 33 साल के टीजे को ड्रग ओवरडोज से कार्डियक अरेस्ट हुआ. उन्हें केंटकी के बैपटिस्ट हेल्थ रिचमंड अस्पताल में भर्ती किया गया. सीपीआर और शॉक देने के बाद भी उनका दिल 35 मिनट तक नहीं चला. ब्रेन स्कैन में सूजन दिखी. डॉक्टरों ने कोई ब्रेन एक्टिविटी नहीं पाई. परिवार को बताया गया कि वह ब्रेन डेड है.
यह भी पढ़ें: अमेरिका, यूरोप, रूस में क्यों पड़ रही है इतनी सर्दी... जैसे फ्रीजर खोल दिया हो
टीजे रजिस्टर्ड ऑर्गन डोनर थे. परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए लाइफ सपोर्ट हटाने और ऑर्गन दान देने का फैसला किया. अस्पताल में ऑनर वॉक (सम्मान यात्रा) हुई, जहां स्टाफ ने उन्हें विदाई दी. टीजे की बहन डोना रोरर ने देखा कि उनकी आंखें खुलीं और लोगों को फॉलो कर रही थीं. डॉक्टरों ने कहा कि यह सिर्फ रिफ्लेक्स है, सामान्य बात है.
लेकिन ऑपरेशन थिएटर में जब ऑर्गन निकालने की तैयारी हो रही थी – शरीर को शेव किया जा रहा था, सर्जिकल शीट लगाई जा रही थी – टीजे अचानक हाथ-पैर पटकने लगा. रोने लगा. एक ऑर्गन प्रिजर्वेशनिस्ट नताशा मिलर ने देखा कि वह जिंदा लग रहा था. डॉक्टरों ने सर्जरी रोक दी. टीजे को वापस ICU ले गए.
हफ्तों बाद वह अस्पताल से घर लौटा. आज वह चल-फिर सकता है. खुद खा सकता है. बात कर सकता है, लेकिन याददाश्त बहुत कमजोर है. उसकी बहन डोना अब उसकी कानूनी अभिभावक हैं.
मौत की परिभाषा पर सवाल क्यों?
ब्रेन डेथ क्या है? ब्रेन डेथ का मतलब है कि मस्तिष्क पूरी तरह बंद हो गया है – कोई रिफ्लेक्स, कोई ब्रेन वेव नहीं. अमेरिका में इसे कानूनी मौत माना जाता है, भले ही दिल मशीन से चल रहा हो.
लेकिन इस केस में टीजे को डोनेशन आफ्टर सर्कुलेटरी डेथ (DCD) के तहत तैयार किया गया था, जहां दिल रुकने के बाद ऑर्गन निकाले जाते हैं, न कि ब्रेन डेथ के बाद.
जांच में पता चला कि कई बार मरीजों में जीवन के संकेत दिखते हैं, लेकिन ऑर्गन प्रोक्योरमेंट ऑर्गनाइजेशन (जैसे KODA) दबाव डालता है कि प्रक्रिया जारी रखी जाए.
अमेरिकी सरकार की जांच (HRSA) में 350 मामलों की जांच हुई. 73 मामलों में मरीजों में चेतना के संकेत थे, लेकिन प्रक्रिया नहीं रोकी गई. कुछ मरीज दर्द या परेशानी दिखा रहे थे.
यह भी पढ़ें: चीन के बड़े-बड़े जनरल क्यों निपटाए जा रहे हैं, क्या शी जिनपिंग इन्हें खतरा मानने लगे हैं
मौत तुरंत नहीं होती?
हाल के अध्ययनों में देखा गया है कि दिल रुकने के बाद भी कुछ मिनटों तक गामा ब्रेन वेव्स (जो याददाश्त और चेतना से जुड़ी हैं) बढ़ सकती हैं. निकट-मृत्यु अनुभव (NDE), जागने के मामले और ब्रेन एक्टिविटी के सबूत बताते हैं कि मौत लाइट्स आउट जैसी तुरंत नहीं होती. यह धीरे-धीरे हो सकती है.
इससे ऑर्गन डोनेशन के नियमों पर बहस छिड़ गई है...
क्या प्रभाव पड़ा?
इस केस के बाद अमेरिका में ऑर्गन डोनर रजिस्ट्री से नाम हटाने वालों की संख्या बढ़ गई. कई लोग डर गए. लेकिन ऑर्गन डोनेशन संगठन कहते हैं कि ऐसे मामले बहुत दुर्लभ हैं. फिर भी यह घटना डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं को सोचने पर मजबूर कर रही है कि जीवन और मौत के बीच की रेखा उतनी साफ नहीं है जितनी हम सोचते हैं.
आजतक साइंस डेस्क