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साइंस न्यूज़

अमेरिका, यूरोप, रूस में क्यों पड़ रही है इतनी सर्दी... जैसे फ्रीजर खोल दिया हो

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST
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अमेरिका, यूरोप, रूस में भयंकर सर्दी का तूफान तेजी से फैल रहा है. अमेरिका में टेक्सास से न्यू इंग्लैंड तक के राज्य इस तूफान की चपेट में हैं. जमाने वाली बारिश, बर्फ और बर्फीली हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं. रूस के कामचटका में भी इसका असर है. चार मंजिला ऊंची बर्फ गिरी है. Photo: AP

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मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यात्रा करना खतरनाक होगा. ठिठुरन बढ़ेगी. कई दिनों तक बिजली गुल हो सकती है. यह तूफान सर्दी की शुरुआत में आई हल्की गर्मी के बाद लोगों के लिए झटका जैसा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पहले की गर्मी ही इस तूफान को इतना तेज बना रही है? Photo: AP

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इस सर्दी के तूफान को समझने के लिए हमें पृथ्वी से 32 km ऊपर देखना होगा. जहां स्ट्रैटोस्फेरिक पोलर वोर्टेक्स है.भयंकर सर्दी के तूफान बनाने के लिए कई कारण एक साथ आते हैं. ये तूफान तब बनते हैं जब सतह के पास तापमान में तेज अंतर होता है. जेट स्ट्रीम (हवा की तेज धारा) दक्षिण की ओर झुक जाती है. Photo: AP

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जनवरी के अंत में, उत्तर से आने वाली ठंडी आर्कटिक हवा गर्म दक्षिणी हवा से मिल रही थी, जिससे तापमान का तेज अंतर बन रहा था. जेट स्ट्रीम में कई गड़बड़ियां एक साथ काम कर रही थीं, जिससे बारिश के लिए अच्छी स्थिति बनी. साथ ही, तूफान मेक्सिको की खाड़ी से बहुत गर्म नमी खींच रहा था. Photo: AP

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जेट स्ट्रीम की सबसे तेज हवाएं ट्रोपोस्फियर (वायुमंडल की सबसे निचली परत) के ऊपरी हिस्से में चलती हैं. ट्रोपोस्फियर पृथ्वी की सतह से करीब 11 किलोमीटर ऊपर तक है. मौसम के अलग-अलग सिस्टम इसी परत में रहती हैं, क्योंकि इसके ऊपर वायुमंडल स्थिर हो जाता है. Photo: AP

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ट्रोपोस्फियर के ऊपर स्ट्रैटोस्फियर है. स्ट्रैटोस्फियर मौसम से ऊपर है, लेकिन यह वायुमंडलीय तरंगों के जरिए मौसम से जुड़ सकता है. ये तरंगें ऊपर-नीचे चलती हैं, जैसे जेट स्ट्रीम में दक्षिण की ओर झुकाव वाली तरंगें, लेकिन ये वर्टिकल होती हैं. Photo: AP

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उत्तरी गोलार्ध का स्ट्रैटोस्फेरिक पोलर वोर्टेक्स उत्तरी ध्रुव के चारों ओर तेज हवा की पट्टी है. यह जेट स्ट्रीम की तरह है, लेकिन ऊपर और कम लहरदार होती है, ध्रुव के करीब. कभी-कभी यह पोलर वोर्टेक्स दक्षिण की ओर फैल जाता है और अमेरिका पर छा जाता है. जिससे ठंड और बर्फ के लिए सही स्थिति बनती है. Photo: AP

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जेट स्ट्रीम में सबसे बड़े झटके सबसे ज्यादा ऊर्जा से जुड़े होते हैं. सही स्थिति में, यह ऊर्जा पोलर वोर्टेक्स से टकराकर ट्रोपोस्फियर में वापस आती है, जिससे जेट स्ट्रीम के उत्तर-दक्षिण झटके बढ़ जाते हैं. इससे उत्तरी अमेरिका में भयंकर सर्दी का मौसम आता है. यही हो रहा है. Photo: AP

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पृथ्वी निश्चित रूप से गर्म हो रही है, क्योंकि मानव गतिविधियां ग्रीनहाउस गैसें छोड़ रही हैं जो गर्मी को रोकती हैं. कुल मिलाकर बर्फ कम गिर रही है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भयंकर सर्दी के तूफान कभी नहीं आएंगे. गर्म जलवायु में ठंडी घटनाएं कम होंगी, लेकिन जब आएंगी तो उतनी ही तेज होंगी. Photo: AP

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गर्म समुद्र से ज्यादा भाप बनता है. गर्म वायुमंडल ज्यादा नमी रख सकता है, इसलिए तूफानों के लिए ज्यादा नमी उपलब्ध होती है. नमी के जुड़ने से तूफानों को ऊर्जा मिलती है. गर्म वातावरण में पहले बर्फ के रूप में गिरने वाली वर्षा अब बर्फीली बारिश या स्लीट के रूप में गिर सकती है. Photo: AP

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जेट स्ट्रीम पहले ठंडी हवा को आर्कटिक में रखती थी, जो निचले इलाकों की गर्म हवा से अलग थी. लेकिन अब जेट स्ट्रीम विकृत हो रही है, जिससे आर्कटिक तेज गर्म होता है और निचले हिस्से ठंडे. इसे ओपन डोर्स फीडबैक कहा जाता है, जैसे फ्रीजर का दरवाजा खुला छोड़ दिया हो. Photo: AP

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वैश्विक तापमान वृद्धि से कई फीडबैक आते हैं, जैसे वायुमंडल में ज्यादा जलवाष्प, पोलर एम्प्लिफिकेशन और जेट स्ट्रीम की गड़बड़ी. इससे उत्तरी गोलार्ध में कभी-कभी असामान्य ठंड पड़ती है. वैज्ञानिक इन भयंकर मौसम घटनाओं की भविष्यवाणी और प्रतिक्रिया में सुधार कर रहे हैं, लेकिन कई सवाल बाकी हैं. Photo: AP

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