वैज्ञानिकों के बीच एक रोचक और थोड़ा अजीब चर्चा हो रही है. क्या हमारा ब्रह्मांड अकेला नहीं है? क्या बिग बैंग से पहले एक 'आईने जैसा ब्रह्मांड' था, जहां समय हमारी दिशा से उल्टा चलता हो और एंटीमैटर (विपरीत पदार्थ) ज्यादा हो? सामान्य भाषा में कहें तो आप आईने के सामने खड़े हों लेकिन आईने में आप खुद को धुंधला देख रहे हों. या आपका ही एकदम उल्टा स्वरूप दिख रहा हो.
यह आइडिया सबसे पहले 2018 में तीन भौतिक विज्ञानियों – लैथम बॉयल, कियरन फिन और नील ट्यूरॉक – ने दिया था. उन्होंने 'फिजिकल रिव्यू लेटर्स' नाम की प्रसिद्ध पत्रिका में एक पेपर प्रकाशित किया था. अब ये फिर सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहै. तीनों वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रह्मांड CPT-सिमेट्रिक है.
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CPT सिमेट्री क्या है?
भौतिकी में एक महत्वपूर्ण नियम है – CPT सिमेट्री. इसका मतलब...
C (चार्ज): कणों को उनके विपरीत चार्ज वाले (जैसे इलेक्ट्रॉन को पॉजिट्रॉन) में बदलो.
P (पैरिटी): बायें-दायें को उल्टा करो, जैसे आईने में देखना.
T (टाइम): समय की दिशा उल्टी करो.
इस बदलाव के बाद भी भौतिकी के नियम वही रहते हैं. लेकिन हमारा ब्रह्मांड समय में आगे की ओर चलता है और मैटर (सामान्य पदार्थ) ज्यादा है, एंटीमैटर कम. इससे CPT सिमेट्री टूटती हुई लगती है.
मिरर यूनिवर्स का आईडिया
वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रह्मांड अकेला नहीं, बल्कि एक जोड़ी है. हमारा ब्रह्मांड और उसका 'आईना' – एंटी-यूनिवर्स है. बिग बैंग इन दोनों के बीच का केंद्र बिंदु है.
यह जोड़ी मिलकर CPT सिमेट्री को पूरा करती है. जैसे आईने में आपका उल्टा प्रतिबिंब देखकर पूरा चित्र संतुलित लगता है.
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यह विचार क्यों खास है?
यह मॉडल ब्रह्मांड की कई बड़ी पहेलियों को सुलझाने का दावा करता है...
मैटर-एंटीमैटर असंतुलन: बिग बैंग में बराबर मैटर और एंटीमैटर बनना चाहिए था, जो आपस में टकराकर खत्म हो जाते. लेकिन हमारा ब्रह्मांड मैटर से भरा है. मिरर यूनिवर्स में एंटीमैटर ज्यादा होने से संतुलन बनता है.
डार्क मैटर: यह अदृश्य पदार्थ ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा है. मॉडल कहता है कि भारी राइट-हैंडेड न्यूट्रिनो (एक प्रकार के कण) डार्क मैटर हो सकते हैं.
क्या सबूत हैं?
फिलहाल कोई सीधा सबूत नहीं है. यह एक सैद्धांतिक विचार है, जो गणितीय रूप से सुंदर है. नील ट्यूरॉक हाल के वर्षों में भी इस पर बात करते रहे हैं, जैसे 2024-2025 में प्रकाशित लेखों में. वे कहते हैं कि यह ब्रह्मांड को ज्यादा सरल बनाता है. लेकिन कई वैज्ञानिक संशय में हैं.
उनका कहना है कि यह सिर्फ एक अच्छी कहानी है, लेकिन ऑब्जर्वेशन से साबित नहीं होती. CERN जैसे प्रयोगशालाओं में न्यूट्रिनो पर प्रयोग हो रहे हैं, जो इसकी जांच कर सकते हैं – जैसे क्या न्यूट्रिनो द्रव्यमान-रहित हैं या नहीं. भविष्य में अगर ऐसे प्रयोग इस मॉडल को सही साबित करें, तो ब्रह्मांड की समझ पूरी तरह बदल जाएगी. तब हम जानेंगे कि हमारा ब्रह्मांड अकेला नहीं, बल्कि एक बड़े आईने का हिस्सा है.
आजतक साइंस डेस्क