झुलसाने वाली गर्मी से मूसलाधार बारिश तक... 2025 बना धरती का सबसे गर्म साल

साल 2025 रिकॉर्ड में दर्ज सबसे गर्म सालों में से एक रहा. बीते साल दुनिया ने चरम मौसम की घटनाओं का सामना किया. कहीं भीषण गर्मी, कहीं भारी बारिश जैसे हालात रहे. लगातार बढ़ते तापमान ने यह साफ कर दिया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के नकारात्मक असर अब सीधे तौर पर दिखाई देने लगे हैं.

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साल 2025 सबसे गर्म सालों में शामिल रहा. (Photo: REUTERS) साल 2025 सबसे गर्म सालों में शामिल रहा. (Photo: REUTERS)

आशुतोष मिश्रा

  • जेनेवा,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

साल 2025 में दुनिया ने अत्यधिक मौसम की घटनाएं देखीं. कहीं अत्यधिक गर्मी, कहीं मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़, और अब मॉस्को में 146 सालों का रिकॉर्ड तोड़ने वाली बर्फबारी. वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण ग्लोबल वॉर्मिंग के नकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं, जिसने बीते साल को अब तक के सबसे गर्म सालों में से एक बना दिया है.

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने पुष्टि की है कि साल 2025 रिकॉर्ड में दर्ज सबसे गर्म सालों में से एक रहा. WMO संयुक्त राष्ट्र की वह एजेंसी है जो मौसम, जलवायु और जल से संबंधित मामलों में निर्णय लेने के लिए समेकित और प्रामाणिक विश्लेषण प्रदान करती है. पिछले 11 साल अब तक के सबसे गर्म 11 साल रहे हैं. ला नीना की वजह से थोड़ी अस्थायी ठंडक जरूर आई, लेकिन इससे लंबे समय की गर्मी की प्रवृत्ति पर कोई असर नहीं पड़ा. महासागर लगातार गर्म होते जा रहे हैं. 

WMO द्वारा आठ डेटासेट के समेकित विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक औसत सतही तापमान 1850–1900 के औसत से 1.44 डिग्री सेल्सियस (±0.13 डिग्री सेल्सियस की अनिश्चितता के साथ) अधिक रहा. इनमें से 2 डेटासेट ने 2025 को 176 सालों के रिकॉर्ड में दूसरा सबसे गर्म साल बताया, जबकि बाकी 6 ने इसे तीसरा सबसे गर्म साल बताया.

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साल 2023 से 2025 तक के तीनों साल सभी 8 डेटासेट में अब तक के सबसे गर्म तीन साल रहे हैं. वहीं, 2015 से 2025 तक के 11 साल सभी डेटासेट में सबसे गर्म 11 साल रहे हैं. WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि साल 2025 की शुरुआत और अंत ला नीना के कारण ठंडक के साथ हुआ, फिर भी यह वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड में सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा.

इसका कारण हमारे वायुमंडल में गर्मी को रोकने वाली ग्रीनहाउस गैसों का लगातार संचय है. भूमि और महासागरों का उच्च तापमान हीटवेव, भारी वर्षा और तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवात जैसी चरम मौसम घटनाओं को बढ़ावा देता है, जो शुरुआती चेतावनी प्रणालियों की जरूरत को बताता है.

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साउलो ने आगे कहा, वैश्विक स्तर पर सहयोग और वैज्ञानिक रूप से कठोर डेटा संग्रह पर आधारित WMO की जलवायु निगरानी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, ताकि पृथ्वी से जुड़ी जानकारी प्रामाणिक, सुलभ और सभी के लिए उपयोगी हो.

महासागरों का तापमान भी ज्यादा रहा

Advances in Atmospheric Sciences में प्रकाशित एक अलग अध्ययन में कहा गया है कि 2025 में महासागरों का तापमान भी रिकॉर्ड में सबसे अधिक में से एक रहा, जो जलवायु प्रणाली में दीर्घकालिक गर्मी संचय को दर्शाता है. वैश्विक ऊष्मीकरण से उत्पन्न लगभग 90 प्रतिशत अतिरिक्त ऊष्मा महासागरों में संचित होती है, जिससे महासागरीय ऊष्मा जलवायु परिवर्तन का एक जरूरी संकेतक बन जाती है.

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चीनी विज्ञान अकादमी के वायुमंडलीय भौतिकी संस्थान के लिजिंग चेंग के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, 2024 से 2025 के बीच वैश्विक ऊपरी 2000 मीटर महासागर की ऊष्मा सामग्री (OHC) में लगभग 23 ± 8 जेटाजूल की वृद्धि हुई. यह 2024 में विश्व की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता से लगभग 200 गुना अधिक है.

क्षेत्रीय स्तर पर, वैश्विक महासागर क्षेत्र का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा अपने ऐतिहासिक (1958–2025) तीन सबसे गर्म सालों में शामिल रहा, जबकि लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा शीर्ष 5 में रहा. इसमें उष्णकटिबंधीय और दक्षिण अटलांटिक महासागर, भूमध्य सागर, उत्तर हिंद महासागर और दक्षिणी महासागर शामिल हैं, जो महासागरों में व्यापक स्तर पर हो रही गर्मी को दर्शाता है. अध्ययन के अनुसार, 2025 में वैश्विक वार्षिक औसत समुद्री सतह तापमान (SST) 1981–2010 के औसत से 0.49 डिग्री सेल्सियस अधिक था. 2024 की तुलना में 0.12 ± 0.03 डिग्री सेल्सियस कम रहा. यह ला नीना की स्थिति के अनुरूप है, फिर भी 2025 रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म साल रहा.

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