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...बस टारगेट की तरफ दाग दो, भारत की ये मिसाइल मारने तक नहीं छोड़ेगी पीछा

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST
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जब रूसी सेना के टैंक, हेलिकॉप्टर और बख्तरबंद वाहन यूक्रेन में घुसे तो हाहाकार मच गया. उसके बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए जिसमें अचानक एक जगह से एक मिसाइल इन्हें बर्बाद कर देती है. यह मिसाइल छोटी लेकिन घातक होती है. कंधे से, ट्राईपॉड से या बाईपॉड से इसे दागा जा सकता है. इस मिसाइल को टैंक पर तैनात किया जा सकता है. हेलिकॉप्टर में लगाया जा सकता है. या फिर किसी इमारत से अर्बन वॉरफेयर में उपयोग किया जा सकता है. ये थी यूक्रेन को दी गई अमेरिकी जैवलिन मिसाइल (US Javelin Missile). लेकिन भारत के पास है इससे ताकतवर इजरायली मिसाइल. जो दुश्मन के होश उड़ा देगी. (फोटोः विकिपीडिया)

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चीन के साथ सीमा विवाद के समय भारत ने इजरायल से इमरजेंसी यूज के लिए इन मिसाइलों की छोटी मात्रा मंगाई थी. इस मिसाइल का नाम है स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (Spike Anti-Tank Guided Missile - Spike ATGMs) कहते हैं. इसकी तकनीक इतनी अच्छी है कि टारगेट न भाग सकता है न छिप सकता है. यह उसे नष्ट करने तक पीछा करती रहती है. यानी दागो और भूल जाओ. (फोटोः विकिपीडिया)

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इजरायल इसका उपयोग 1981 से कर रहा है. इसका उपयोग दुनिया के 35 देश कर रहे हैं. यह 1982 से लेकर अब तक 6 से 7 बड़े युद्धों में उपयोग की जा चुकी है. इसे बनाया था राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम ने. साल 2017 से लेकर अब तक इसके 28,500 यूनिट्स बनाए जा चुके हैं. 2019 के शुरुआत में चीन और पाकिस्तान के साथ होने वाले संघर्षों को लेकर भारत सरकार ने आपातकालीन स्थिति में 240 स्पाइक MR मिसाइल और 12 लॉन्चर्स मंगाए थे. उसी साल अंत तक इन्हें सेना में शामिल कर दिया गया. (फोटोः विकिपीडिया)

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फिलहाल ऐसी सूचनाएं हैं कि भारत सरकार को ऐसी और मिसाइलें मिली हैं.  कुल 321 लॉन्चर्स और 8356 मिसाइल और 15 ट्रेनिंग सिमुलेटर्स की डील की गई थी. खैर... ये ताकत भारत के पास आ चुकी है. यानी सेना इसका उपयोग दुश्मनों के टैंक्स आदि उड़ाने के लिए कर सकती है. सिर्फ टैंक ही नहीं, ये कम ऊंचाई पर उड़ रहे हेलिकॉप्टर और विमानों को भी मार गिरा सकती है. ये मिसाइल नहीं चलती-फिरती मौत है. (फोटोः विकिपीडिया)

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Spike ATGMs के कुल मिलाकर 9 वैरिएंट्स हैं. ये हैं- Spike-SR, Spike-MR, Spike-LR, Spike-LR2, Spike-ER, Spike-ER2, Spike NLOS, Mini-Spike और Almas. अगर इन्हें हेलिकॉप्टर में तैनात करते हैं तो कैनिस्टर में रखी मिसाइल का वजन होता है 34 किलोग्राम. लॉन्चर का 55 किलोग्राम और लॉन्चर के साथ चार मिसाइलों का वजन होता है 187 किलोग्राम. जमीन से दागी जाने वाली स्पाइक मिसाइल का वजन होता है 14 किलोग्राम, लॉन्चर 5 KG, ट्राइपॉड 2.5 KG, बैटरी 1 KG और थर्मल साइट 4 KG. (फोटोः विकिपीडिया)

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आमतौर पर Spike ATGMs की लंबाई 3 फीट 11 इंच होती है. वैरिएंट्स के अनुसार थोड़ा-बहुत कम ज्यादा हो सकती है. अगर आप तेजी से इसकी फायरिंग करना चाहते हैं तो पूरा सिस्टम ल़न्च के लिए तैयार होने में मात्र 30 सेकेंड का समय लेता है. 15 सेकेंड में रीलोड हो जाता है. अब हम आपको बताते हैं कि Spike ATGMs के अलग-अलग वैरिएंट्स की रेंज...यानी दुश्मन अगर इस रेंज में है तो वो खत्म. (फोटोः विकिपीडिया)

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Spike-SR की रेंज है 50 से 1500 मीटर, Spike-MR की रेंज है 200 से 2500 मीटर, Spike-LR की रेंज है 200 से 4000 मीटर, Spike-LR2 की रेंज है 200 से 5000 मीटर, Spike-ER की रेंज है 400 से 8000 मीटर, Spike-ER2 की रेंज है 400 से 10 हजार मीटर और Spike NLOS की रेंज है 600 से 25 हजार मीटर. ऐसी खबरें भी आ रही है कि भारतीय वायुसेना अपने हेलिकॉप्टरों में लगाने के लिए Spike NLOS चाहती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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Spike ATGMs में टैंडेम चार्ज HEAT वॉरहेड लगाया जाता है. जिसके पीछे एक सॉलिड प्रॉपेलेंट रॉकेट उसे टारगेट तक पहुंचाता है. इसमें इंफ्रारेड होमिंग- इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर लगा होता है, जो दुश्मन को किसी भी मौसम और अंधेरे में भी खोज सकता है. यानी यह टारगेट से निकल रही गर्मी को पकड़कर उसका पीछा करता है. (फोटोः विकिपीडिया)

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भारत सरकार ने साल 2019 में इजरायल के साथ Spike-LR मिसाइल की डील की थी. स्पाइक एलआर चौथी पीढ़ी की मिसाइल है जो चार किलोमीटर तक की दूरी पर सटीक निशाना लगा सकती है. मिसाइल में फायर करने की क्षमता, निगरानी व अपडेट करने की क्षमता है, जो पिनप्वाइंट पर फायर करने की सुविधा देती है.  यह मिसाइल मध्य उड़ान के दौरान कई लक्ष्यों के लिए स्विच करने की क्षमता रखती है. इसे फायर करने वाले व्यक्ति के पास इसे लो या हाई ट्रजेक्टरी से फायर करने का विकल्प होता है. (फोटोः विकिपीडिया)

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मिसाइल में एक इनबिल्ट सीकर होता है, जो इसे फायर करने वालों को दो मोड में इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. यानी दिन (सीसीडी) व रात (आईआईआर) मोड शामिल है. डुअल सीकर मिसाइल की विश्वसनीयता को बढ़ाता है. (फोटोः विकिपीडिया)  

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