Dhanteras 2021: धनतेरस के दिन वैदिक देवता यमराज का पूजन किया जाता है. पूरे वर्ष में एक मात्र यही वह दिन है, जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है. यह पूजा दिन में नहीं की जाती, बल्कि रात में होती है. यमराज की पूजा सिर्फ एक चौमुखी दीप जलाकर की जाती है. यह दीपक आटे का बना होता है. आटे का दीपक बनाकर घर के मुख्य द्वार कर दाईं ओर रख दिया जाता है. इस दीये को जमदीवा, जम का दीया या यमराज का दीपक भी कहा जाता है.
रात को घर की स्त्रियां दीपक में तेल डालकर नई रूई की बत्ती बनाकर, चार बत्तियां जलाती हैं . दीपक की बत्ती दक्षिण दिशा की ओर रखनी चाहिए. दीपक जलाने से पहले उसकी जल, रोली, फूल, चावल, गुड़, नैवेद्य आदि से पूजा करनी चाहिए. घर में पहले से दीपक जलाकर यम का दीया ना निकालें.
चूंकि यह दीपक मृत्यु के नियन्त्रक देव यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन तो करें ही, साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो.
आज ही के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वन्तरि वैद्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वन्तरि जयन्ती भी कहते हैं. इसीलिए वैद्य-हकीम और ब्राह्मण समाज आज धन्वन्तरि भगवान का पूजन कर धन्वन्तरि जयन्ती मनाता है.
बहुत कम लोग जानते हैं कि धनतेरस आयुर्वेद के जनक धन्वन्तरि की स्मृति में भी मनाया जाता है. इस दिन लोग अपने घरों में नए बर्तन खरीदते हैं और उनमें पकवान रखकर भगवान धन्वंतरि को अर्पित करते हैं. लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि असली धन तो स्वास्थ्य है.
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