Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र का दूसरा दिन आज, करें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना, ये रहेगी पूजन विधि

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जातक को ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. तो आइए अब जानते हैं कि क्या रहेगा मां ब्रह्मचारिणी की उपासना का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व.

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चैत्र नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है (Photo: ITG) चैत्र नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:46 AM IST

Chaitra Navratri 2026: आज चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन पर मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है. यह देवी तप, संयम और साधना का प्रतीक मानी जाती हैं. 'ब्रह्मचारिणी' नाम का अर्थ है तपस्या का आचरण करने वाली. मां के एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है, जो एकाग्रता और साधना का संकेत देता है.

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मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को धैर्य, ज्ञान और अनुशासन का पाठ सिखाती हैं. वे बताती हैं कि जीवन में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत, अच्छे आचरण और एकाग्र मन बहुत जरूरी है. खासकर विद्यार्थियों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मां का आशीर्वाद ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करता है.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का मुहूर्त

नवरात्र के दूसरे दिन पर आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा इन विशेष योगों में करें. जिसमें सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग विशेष रहेंगे. सर्वार्थ सिद्धि योग आज पूरे रहेगा और अमृत सिद्धि योग आज सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर 21 मार्च की सुबह तक रहेगा. इन योगों में आज मां की उपासना की जा सकती है. 

मां ब्रह्मचारिणी पूजन विधि

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सफेद रंग का विशेष महत्व होता है. उन्हें सफेद फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से माता को स्नान कराएं. पूजा के दौरान मां को सफेद वस्त्र अर्पित करें, क्योंकि यह रंग उन्हें बहुत प्रिय है. भोग में मेवे, पान, सुपारी, लौंग और इलायची चढ़ाना शुभ माना जाता है. पूजा के अंत में अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा जरूर दें.

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करें ये विशेष उपाय

पूजन के बाद गाय, बैल या सांड को चारा खिलाना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से मां ब्रह्मचारिणी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को निर्भयता, यश और सम्मान का आशीर्वाद देती हैं. इसके बाद मां के विशेष मंत्र 'या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥' का जाप करें. इस मंत्र का 108 बार जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ज्ञान में वृद्धि होती है और व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करता है.

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