सनातन धर्म में सांप को बहुत पूजनीय माना गया है. भगवान शिव स्वयं गले में नाग देवता को धारण करते हैं. भगवान कृष्ण ने वृंदावन वासियों को मुक्ति दिलाने के लिए कालिया नाग के फन पर नृत्य किया था. इतना नहीं नहीं, भगवान विष्णु भी क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर विराजमान हैं. वास्तु शास्त्र में भी सांपों को लेकर कई अहम बातें कही गई हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में कुछ खास जगहों पर सांप की तस्वीरें, प्रतिमा आदि लगाने से व्यक्ति को बड़ा लाभ मिलता है. बस इसमें दिशाओं का विशेष ख्याल रखना चाहिए.
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सांप की प्रतिमा या कोई चित्र लगाने से घर की सुख-समृद्धि को किसी की नजर नहीं लगती है. घर में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और धनधान्य में वृद्धि भी होती है. जो लोग सांप को पेंटिंग या प्रतिमा के रूप में घर में स्थापित करते हैं, उन्हें और भी कई तरह के लाभ मिलते हैं. ऐसे लोगों के कामकाज में कभी कोई बाधा नहीं आती है. करियर में पैदा होने वाले अवरोध स्वत: दूर हो जाते हैं.
किस दिशा में लगाएं सांप की पेंटिंग?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार को बढ़ाने के लिए घर की उत्तर या पूर्व दिशा में ही सांप की पेंटिंग या प्रतिमा लगानी चाहिए. अन्य किसी दिशा में सांप की तस्वीरें लगाने से बचना चाहिए.
ध्यान रहे कि घर सांप की हमेशा छोटी तस्वीरें या प्रतिमा ही रखें. बड़ी तस्वीरें या प्रतिमा सकारात्मक ऊर्जा में प्रतिबंध और भय का कारण बन सकती है. इन तस्वीरों या प्रतिमाओं को कभी घर या रसोई के मुख्य द्वार के सामने न लगाएं.
घर की बुनियाद में नाग-नागिन का जोड़ा
बहुत सारे लोग घर बनवाने से पहले ज्योतिष की सलाह पर नींव में धातु से बने नाग-नागिन का जोड़ा भी रखते हैं. ऐसा कहा जाता है कि जिन घरों की बुनियाद में नाग-नागिन का जोड़ा रखा जाता है, वहां कभी दुख-दरिद्रता कदम नहीं रखती है.
ऐसे घरों में लोग हमेशा भ्रम-भटकाव से बचे रहते हैं. ज्योतिषविदों की सलाह पर लोग चांदी या किसी अन्य धातु के नाग-नागिन बुनियाद में रखते हैं. कुछ खास अवसरों पर लोग ज्योतिषविदों की सलाह लेकर मंदिर में तरह-तरह की धातु के नाग-नागिन चढ़ाते भी हैं.
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