वास्तु दोष भी दूर कर सकता रामचरित मानस, कीजिए ये सटीक उपाय

घर में नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को दूर करने के लिए रामचरितमानस का पाठ एक प्रभावी उपाय है. तुलसीदास द्वारा रचित यह ग्रंथ न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र है. ब घर में नकारात्मकता, तनाव या लगातार बाधाएं बढ़ने लगती हैं, तो लोग इसे वास्तु दोष से जोड़ते हैं. इस दोष को दूर करने के लिए लोग कई तरह के उपाय अपनाते हैं, लेकिन एक बहुत आसान सा उपाय है जो कि घर में पूजा वाले स्थान पर ही मौजूद होता है. 

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तकरीबन हर घर में रामचरित मानस ग्रंथ मौजूद रहता ही है. रामचरितमानस इतना प्रभावी ग्रंथ है कि ये वास्तु दोष भी दूर कर सकता है. महान संत गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह ग्रंथ न सिर्फ धार्मिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन का भी जरिया है. बल्कि ऐसा माना जाता है कि जहां रामचरितमानस का पाठ होता है, वहां नकारात्मक शक्तियां कमजोर पड़ती हैं और वातावरण शुद्ध होता है.

कैसे जुड़ा है वास्तु दोष से संबंध?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दिशा, स्थान और ऊर्जा का व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर पड़ता है. लेकिन कई बार संरचनात्मक बदलाव करना आसान नहीं होता है, ऐसे में आध्यात्मिक उपाय अपनाए जाते हैं, जिनमें रामचरितमानस का पाठ प्रमुख माना जाता है.

रामचरितमानस के सुंदरकांड को विशेष रूप से प्रभावशाली माना गया है. सप्ताह में एक या दो बार इसका पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बाधाएं कम होने लगती हैं.
या फिर घर के मुख्य स्थान या पूजा कक्ष में रोज सुबह और शाम कुछ प्रमुख चौपाइयों का उच्चारण करें. इससे वातावरण में शांति और स्थिरता आती है. लगातार आ रही परेशानियों के समय रामचरितमानस का अखंड पाठ या पारायण कराना शुभ माना जाता है. इससे घर का ऊर्जा संतुलन बेहतर होता है.

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रामचरितमानस को साफ-सुथरे और पवित्र स्थान पर रखें. नियमित रूप से दीपक और अगरबत्ती जलाने से आध्यात्मिक माहौल बनता है. जब पूरा परिवार मिलकर पाठ करता है, तो सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है और आपसी संबंध भी मजबूत होते हैं. यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये उपाय आस्था और मानसिक संतुलन से जुड़े हैं. अगर घर में वास्तु की कोई भौतिक समस्या है, तो उसे तकनीकी तरीके से ठीक करना भी जरूरी होता है.

किस दिशा में रखें ग्रंथ और कैसे करें पाठ
रामचरित मानस को मंदिर में पूर्व (उगते सूर्य की दिशा) या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा  में रखना सबसे अच्छा है. पाठ करते समय बैठने की दिशा भी यही रखें. पाठ करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. पुस्तक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, हमेशा ऊंचे आसन का प्रयोग करें. रामचरितमानस को हमेशा एक साफ लाल कपड़े में लपेटकर (पटरी या स्टैंड पर) ही रखना चाहिए. 

राम चरित मानस की ये चौपाइयां दूर कर देती हैं वास्तु दोष
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के अयोध्या कांड में कुछ चौपाइयां लिखी हैं. जिनका श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाए तो घर की तंगहाली और दरिद्रता दूर होती है. 

जब तें रामु ब्याहि घर आए. नित नव मंगल मोद बधाए
भुवन चारिदस भूधर भारी. सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी।।

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नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें. लोकप करहिं प्रीति रुख राखें
वन तीनि काल जग माहीं. भूरिभाग दसरथ सम नाहीं।।

एक समय सब सहित समाजा. राजसभा रघुराजु बिराजा
सकल सुकृत मूरति नरनाहू. राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू।।

कहि न जाइ कछु नगर बिभूती. जनु एतनिअ बिरंचि करतूती
सब बिधि सब पुर लोग सुखारी. रामचंद मुख चंदु निहारी।।

मुदित मातु सब सखीं सहेली. फलित बिलोकि मनोरथ बेली
राम रूपु गुन सीलु सुभाऊ. प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।
 

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