भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण अवतार का रहस्य... जानिए महाकाली से क्या था कनेक्शन

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो शक्ति और ज्ञान का प्रतीक हैं. भगवान विष्णु के अवतारों जैसे नृसिंह, श्रीराम और श्रीकृष्ण में देवी काली का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

Advertisement
नवरात्रि के सातवें दिन देवी महाकाली की पूजा की जाती है नवरात्रि के सातवें दिन देवी महाकाली की पूजा की जाती है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:10 AM IST

चैत्र नवरात्र का व्रत-अनुष्ठान जारी है. बुधवार को नवरात्रि परंपरा की सातवीं देवी कालरात्रि की पूजा की जा रही है. देवी काली शक्ति का स्वरूप तो है ही, ज्ञान की भी प्रतीक हैं. लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि भगवान विष्णु के कई अवतारों में जैसे नृसिंह, श्रीराम और श्रीकृष्ण में देवी काली का खास योगदान था.

भारत का पूर्वी छोर यानी पश्चिम बंगाल देवी काली का स्थान है तो वहीं पश्चिमी छोर गुजरात भगवान श्रीकृष्ण का.कृष्ण  और काली को एक साथ मिला दें तो कृष्णकाली बनता है. कृष्णकली इसी मिश्रण से बना नाम है. इसमें रहस्य ये है कि, ये नाम असल में राधा रानी का है.

Advertisement

हम यही जानते हैं कि कृष्ण, विष्णु का अवतार हैं, लेकिन ये पूरा सच नहीं है. असल में कृष्ण देवी त्रिपुर सुंदरी (वही प्रथम स्त्री शक्ति, जिसका जिक्र पहले किया) की प्रेरणा से लिया गया काली का अवतार हैं, जिसमें देवी की सहायता पुराण पुरुष (विष्णु जी) ने की थी. उन्होंने ये सहायता कोई पहली बार नहीं की थी, बल्कि पहले हुए कई अवतारों में वो देवी की सहायता कर चुके थे. इस बात का जिक्र दुर्गा चालीसा में लिखी दो पंक्तियों से भी मिलता है. श्रीदुर्गा चालीसा में एक जगह कुछ ऐसा लिखा मिलता है कि-

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा,
परगट भई फाड़कर खम्बा ।
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो,
हिरण्याकुश को स्वर्ग पठायो ।
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं,
श्री नारायण अंग समाहीं ।

विष्णु पुराण के अनुसार नृसिंह अवतार तो विष्णुजी ने लिया तो माता की महिमा में ये चालीसा क्यों गाई जा रही है. असल में इसका मतलब यही है कि विष्णु अवतार के हर रूप में देवी काली ही कहीं न कहीं शामिल थीं. नृसिंह के क्रोध में देवी काली का ही क्रोध शामिल था.

Advertisement

क्या है संसार की सबसे बड़ी शक्ति?
देवी पुराण अपने पहले ही खंड में ये व्याख्या करता है कि संसार की सर्वोच्च शक्ति स्त्रैण है. इस पुराण के अनुसार पृथ्वी का भार समाप्त करने से लिए द्वापर के अंत में महादेव की इच्छा से देवी काली ने मायापुरुष का अवतार लिया. वह देवकी के गर्भ से पुरुष शक्ति के रूप में जन्मीं और उनका नाम अपना ही पर्यायवाची कृष्ण पड़ा. कृष्ण और काली एक ही जैसे अर्थ वाले दो नाम हैं. महादेव ही उनकी प्रिया राधा थे.

सामान्य स्तर पर इसे समझना और समझाना कठिन हो सकता है, लेकिन इसे ही सत्य माना जाता है. इस सत्य पर अपनी मुहर लगाता है वृंदावन में स्थित कृष्णकाली मंदिर. यह मंदिर केशीघाट पर स्थित है. यहां आने वाले भक्त भगवान की छवि में माता स्वरूप ही देखते हैं.

राधा-कृष्ण और महाकाली की लोककथा
इस बारे में एक लोककथा भी कही जाती है. कहते हैं कि जब कृष्ण ब्रज से गए तो राधाजी का विवाह कहीं और हो गया. राधाजी के पति काली भक्त थे. ससुराल जाकर भी राधा निरंतर कृष्ण नाम का जाप करती थीं. एक बार उनकी ननद ने उन्हें कृष्ण कृष्ण कहते सुना तो वो तुरंत जाकर अपने भाई को बुला लाईं और कहती हैं कि देखो आपकी पत्नी पता नहीं किस कृष्ण का जप कर रही हैं, तो जब राधा जी के पति अंदर आये तो उन्होंने ध्यान से सुना तो उन्हें सुनाई दिया की राधा जी कृष्णे-कृष्णे जप रही थीं. ये सुनकर उन्होंने अपनी बहिन को बहुत डांटा कि आप मेरी पत्नी पर लांछन क्यों लगा रही हैं ये तो मेरी आराध्य काली मां का ही नाम जप रही हैं.

Advertisement

ननद को आश्चर्य हुआ की ये कैसे हो गया? मैं गयी तब तो कृष्ण नाम था अब वह महाकाली कैसे हो गया..? तब राधारानी ने मां काली से उनकी लाज बचने के लिए धन्यवाद किया क्योंकि असल में तो राधाजी भगवन कृष्ण का ही जप कर रही थी पर मां काली की सहायता से वो दोनों कृष्ण नाम को काली समझ बैठे . बस उस दिन से मां काली को भी भगवन कृष्ण का नाम मिल गया और उनको भी कृष्ण का ही स्वरूप माने जाने लगा. इसीलिए देवी पूजा में जय श्यामा काली के जयकारे लगाए जाते हैं.

महाकाली के हैं कई रूप
महाकाली स्वरूप इतना विस्तृत है कि उनके साधिका रूप के ही कई अलग नाम हैं. दक्षिणा काली, श्मशान काली, मातृ काली, काम कला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, सिद्ध काली और भद्र काली. देवी की आराधना आप जिस भी रूप में करें वह आपका कल्याण ही करेंगी. तंत्र विद्या में भी मां काली के अघोर स्वरूप की पूजा की जाती है, अगर तंत्र सकारात्मक है और समाज के कल्याण के लिए है तब तो ठीक है, नहीं तो बुरी कामना से किए गए तांत्रिक प्रयोग न तो सफल होते हैं और न ही देवी उन्हें स्वीकार करती हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »