सावन में शिवलिंग पर गंगाजल के साथ-साथ बेलपत्र चढ़ाने का एक विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र भोलेबाबा को बेहद पसंद हैं. श्रद्धालु महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में दूध मिश्रित गंगाजल के साथ बेलपत्र भी चढ़ाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं बेलपत्र तोड़ते और उसे शिव को अर्पित करते समय कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है. आइए जानते हैं आखिर क्या हैं बेलपत्र तोड़ने से लेकर चढ़ाने तक से जुड़े सभी जरूरी नियम.
बेलपत्र को संस्कृत में 'बिल्वपत्र' कहा जाता है. यह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है. ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है. पूजा में इनका प्रयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं.
हमारे धर्मशास्त्रों में ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिससे धर्म का पालन करते हुए पूरी तरह प्रकृति की रक्षा भी हो सके. यही वजह है कि देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल और पत्र को तोड़ने से जुड़े कुछ नियम बनाए गए हैं.
बेलपत्र तोड़ने के नियम:
-चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें.
-बेलपत्र भगवान शंकर को बहुत प्रिय है, इसलिए इन तिथियों या वार से पहले तोड़ा गया पत्र चढ़ाना चाहिए.
-शास्त्रों में कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र न मिल सके, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है.
बेलपत्र तोड़ने के नियम:
- टहनी से चुन-चुनकर सिर्फ बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए, कभी भी पूरी टहनी नहीं
तोड़ना चाहिए. पत्र इतनी सावधानी से तोड़ना चाहिए कि वृक्ष को कोई नुकसान न
पहुंचे.
-बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए.
शिवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र:
-महादेव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए, यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए.
-बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए.
-बेलपत्र 3 से लेकर 11 दलों तक के होते हैं. ये जितने अधिक पत्र के हों, उतने ही उत्तम माने जाते हैं.
शिवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र:
-अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो बेल के वृक्ष के दर्शन ही कर लेना चाहिए. उससे भी पाप-ताप नष्ट हो जाते हैं.
-शिवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए.