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धर्म

गंगासागर का मेला, सैकड़ों तीर्थयात्राओं के बराबर मिलता है पुण्य

रोहित
  • 05 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST
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गंगासागर मेला की चर्चा हिन्दू धर्मग्रन्थों में मोक्षधाम के तौर पर की जाती है. यह मेला पश्चिम बंगाल में गंगा के सागर से मिलन के स्थान पर लगता है इसलिए इस स्थान को गंगासागर कहा जाता है. इस मेले में मकर संक्रांति के मौके पर दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु मोक्ष की कामना में सागर-संगम में डुबकी लगाते हैं.

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कपिल मुनि का मंदिर:
यह स्थान पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले में पड़ता है. यहां कपिल मुनि का मंदिर है, जिन्होंने भगवान राम के पूर्वज और इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार किया था. मान्यता है कि यहां मकर संक्रांति पर पुण्य-स्नान करने से मोक्ष का मार्ग आसान हो जाता है. इस साल यह मेला 9 जनवरी से शुरू हो रहा है.

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सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार:
गंगासागर के बारे में एक कहावत है कि, 'सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार' मतलब साफ है कि गंगासागर की तीर्थयात्रा को सैकड़ों तीर्थयात्राओं के बराबर माना जाता है.

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मकर संक्रांति से एक हफ्ता पहले शुरू होता है मेला:
गंगासागर का मेला मकर संक्रांति (14 जनवरी) से एक हफ्ता पहले ही शुरू हो जाता है. इस मौके पर तीर्थयात्री, साधु-संत यहां आते हैं और संगम में स्नान कर सूर्यदेव को अर्ध्य देते हैं.

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कपिल मुनि की पूजा:
मकर संक्रांति के दिन लोग तिल, चावल और तेल का दान देते हैं. अनेक श्रद्धालु सागर देवता को नारियल अर्पित करते हैं, वहीं गऊदान भी किया जाता है. यहां सूर्यपूजा के साथ विशेष तौर कपिल मुनि की पूजा की जाती है.

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मकर संक्रांत‌ि है सबसे महत्वपूर्ण:
हिन्दू मान्यता के अनुसार, साल की 12 संक्रांत‌ियों में मकर संक्रांत‌ि का सबसे महत्व ज्यादा है. इस द‌िन सूर्य मकर राश‌ि में आते हैं और इसके साथ देवताओं का द‌िन शुरु हो जाता है, जो देवशयनी एकादशी से सुप्त हो जाते हैं.

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20 लाख श्रद्धालु लगाएंगे डुबकी:
इस वर्ष गंगासागर का मेला 9 जनवरी से शुरू हो रहा है जो मकर संक्रांति तक चलेगा. मेले में 20 लाख श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है.
 

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