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धर्म

होली के दिन तक भूलकर भी ना करें ये काम!

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 12 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST
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 होली से पहले 8 दिनों का समय होलाष्टक कहा जाता है. होली के 8 दिन पूर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक लग जाता है जो पूर्णिमा तक जारी रहता है. ऐसे में इन 8 दिनों में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है. होलाष्टक के इन 8 दिनों को वर्ष का सबसे अशुभ समय माना जाता है.

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इस बार होलाष्टक 23 फरवरी से शुरू होकर 1 मार्च 2018 तक रहेगा. इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. पौराणिक विवरण के मुताबिक, होली के आठ दिन पूर्व अर्थात फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है.

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मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव ने होलाष्टक के पहले दिन कामदेव को भस्म कर दिया था क्योंकि कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने की कोशिश की थी.

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होलाष्टक को लेकर एक और कहानी प्रचलित है. कहते हैं महान दैत्य हिरण्यकश्यप ने भगवान से वरदान मिलने के बाद भक्त प्रह्लाद पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था. फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी को हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को बंदी बनाकर यातनाएं दी. साथ ही होलिका ने भी प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया, लेकिन वह स्वयं ही जल गई और प्रह्लाद बच गए. इन आठ दिनों में प्रह्लाद को यातनाएं देने के कारण ही यह समय होलाष्टक कहा जाता है.

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उत्तरी भारत में होलाष्टक को अशुभ माना जाता है. इस अवधि में लोग कोई भी नया काम नहीं शुरू करते हैं. इन 8 दिनों में ग्रह अपना स्थान बदलते हैं. ग्रहों के इन बदलाव की वजह से होलाष्टक के दौरान किसी भी शुभ कार्य को शुरू नहीं किया जाता है.

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होलाष्टक के दौरान ये कार्य बिल्कुल ना करें-

होलाष्टक के 8 दिन किसी भी मांगलिक शुभ कार्य को करने के लिए शुभ नहीं होता है. इस दौरान ये कार्य बिल्कुल नहीं करने चाहिए- शादी, भूमि पूजन, गृह प्रवेश, हिंदू धर्म के 16 संस्कार, कोई भी नया व्यवसाय या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए.

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होलाष्टक पर होने वाले रीति-रिवाज-

होलाष्टक शुरू होने पर दो डंडिया रखी जाती है. इसमें से एक डंडी होलिका और दूसरी प्रहलाद का प्रतिनिधित्व करती है.  इन डंडियों की स्थापना के बाद होलिका दहन के दिन तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है.  इस दिन होलिका दहन के लिए स्थान का भी चुनाव किया जाता है और उसे गंगाजल से साफ किया जाता है. इसी दिन से लोग होलिका दहन के लिए लकड़ियां, उपले, सूखी घास इत्यादि इकठ्ठा करना शुरू कर देते हैं.

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होलाष्टक मुख्यत: हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में माना जाता है.

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होलाष्टक के दौरान कर सकते हैं ये काम-
ऐसा माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान किसी जरूरतमंद को दान करना बहुत ही शुभ फलदायी होता है.


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तांत्रिकों के लिए होलाष्टक है महत्वपूर्ण-
ऐसा विश्वास है कि तांत्रिकों के लिए होलाष्टक बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि होलाष्टक के दौरान उनकी ऊर्जा बढ़ जाती है. इस दौरान तांत्रिक साधना करते हैं.

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