हिंदू धर्म में छठ महापर्व का विशेष महत्व बताया गया है. यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. एक छठ कार्तिक मास में मनाई जाती है. जबकि दूसरी छठ चैत्र मास में पड़ती है. चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाली इस छठ को चैती छठ के नाम से भी जाना जाता है. छठ के महापर्व में सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है. (Photo- Adobe Stock)
यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि चैती छठ के दौरान सूर्य देव और छठी मैय्या की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. संतान की रक्षा होती है और उसे आरोग्य का वरदान मिलता है. (Photo- Adobe Stock)
चैती छठ की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैती छठ पर्व की शुरुआत 22 मार्च से होने वाली है और इसका समापन 25 मार्च को किया जाएगा. (Photo- Adobe Stock)
नहाय-खाय
चैती छठ का महापर्व 22 मार्च को नहाय-खाय से शुरू होगा. इस दिन व्रत रखने वाले लोग स्नान करने के बाद शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. आमतौर पर इस दिन लौकी की सब्जी और भात खाने की परंपरा है. (Photo- Adobe Stock)
खरना की तिथि
दूसरे दिन यानी 23 मार्च को खरना किया जाएगा. इस दिन शाम के समय मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ से बनी खीर और रोटी का प्रसाद तैयार किया जाता है. इसके बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू करते हैं. (Photo- Pixabay)
डूबते सूर्य को अर्घ्य
तीसरे दिन यानी 24 मार्च को अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इस दिन लोग व्रती नदी या तालाब के घाट पर पहुंचकर छठी मैया के गीत गाते हैं और सूप में फल, ठेकुआ आदि रखकर सूर्य देव की पूजा करते हैं. (Photo- Pixabay)
उगते सूर्य को अर्घ्य
चौथे दिन यानी 25 मार्च को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन किया जाएगा. इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपने व्रत का पारण करते हैं. (Photo- Pixabay)