दिवाली वाले दिन लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए. इससे घर की सारी निगेटिविटी दूर हो जाएगी.
Diwali 2018: जानें दिवाली की रात क्यों बनाया जाता है काजल?
दिवाली वाले दिन शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं. ध्यान रहे सभी चावल पूर्ण होने चाहिए. खंडित चावल न हो. ये काम मंदिर में ही करें.
लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ जरूरी रखें और पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी में रखें.
दिवाली अमावस्या के दिन पड़ती है. इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ में जल जरूर दें. इससे शनि के दोष और कालसर्प दोष खत्म हो जाता है. साथ ही देर रात पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं. ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आएं, पलटकर न देखें.
दिवाली के दिन किसी मंदिर में झाड़ू का दान करें. यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का दान करें.
दिवाली पर पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र स्थापित करें. स्फटिक का श्रीयंत्र बेहतर होगा.
दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके. सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजन करें.
प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें. दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है. दिवाली के शुभ दिन यह उपाय करने से गणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है.
दिवाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है.
दिवाली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए. पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें. जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखें.
दिवाली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें.