लक्ष्मी मां की अकेले पूजा ना करें. भगवान विष्णु के बिना उनका पूजन अधूरा माना जाता है.
दिवाली की पूजा के बाद पूजा कक्ष को बिखरा हुआ ना छोड़ दें. पूरी रात एक दीया जलाए रखें और उसमें घी डालते रहें.
दिवाली पर कैंडल्स के बजाए ज्यादा से ज्यादा दीयों का इस्तेमाल करें.
उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा कक्ष होना चाहिए. घर के सभी सदस्यों को पूजा के दौरान उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए.
पूजा के दीए को घी से जलाएं. दीए 11, 21 या 51 की गिनती में होने चाहिए.
गणेश भगवान की ऐसी मूर्ति पूजा कक्ष में ना रखें जिसमें वह बैठी हुई मुद्रा में ना हों और उनकी सूंड दायीं तरफ ना हो.
लक्ष्मी पूजन के वक्त पटाखे ना जलाएं. लक्ष्मी पूजा के तुरंत बाद भी पटाखे नहीं जलाने चाहिए.
दिवाली की पूरी रात घर के दक्षिण-पूर्वी कोने में घी या तेल का दीपक जलाएं. दीए को मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देवता और भगवान इन्द्र के प्रतीक के तौर पर 4 के समूह में जलाना चाहिए.
ज्यादा से ज्यादा लाल रंग का प्रयोग करें. दिया, कैंडल्स, लाइट्स और लाल रंग के फूलों का इस्तेमाल करें. दिवाली पूजा की शुरुआत विघ्नकर्ता भगवान गणेश की पूजा के साथ करें.
अगर आप व्यवसायी हैं तो दिवाली के दिन अपने हिसाब-किताब के रजिस्टर की भी जरूर पूजा करें. मां लक्ष्मी के सामने इसे भी रखें.
मां लक्ष्मी शांतिप्रिय हैं इसलिए परिवार के सदस्यों के बीच झगड़ा नहीं होना चाहिए. घर पर शांति और प्रेम का माहौल बनाए रखें. अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर मां लक्ष्मी जी की आरती करें.
दिवाली के दिन घर या बाहर किसी से भी झगड़ा ना करें. मां लक्ष्मी शांतिप्रिय है इसीलिए मां लक्ष्मी को अपने घर बुलाना चाहते हैं तो घर में बिल्कुल भी कलह ना करें.
दिवाली के दिन नाखून काटना, शेविंग जैसे कार्य वर्जित हैं.
दिवाली के दिन सुबह देर तक सोते ना रह जाएं. जल्दी उठे और पूजा-पाठ करें.
दिवाली के दिन मांस और शराब-धूम्रपान इत्यादि से दूर रहना चाहिए. इस दिन हो सके तो सात्विक भोजन ग्रहण करें.