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धर्म

25 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और नियम

aajtak.in
  • 24 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST
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नवरात्रि वर्ष में चार बार आते हैं. ये माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन में होते हैं. धर्म ग्रंथों, पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्रों का समय बहुत ही भाग्यशाली बताया गया है. नवरात्रि से वातावरण के तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है. मन में उल्लास, उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है.

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इस समय मां भगवती की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है. इस समय बसंत ऋतु होने की वजह से इसे वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है. चैत्र नवरात्रों के दौरान मां की पूजा के साथ-साथ अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा का विधान भी है जिससे ये नवरात्रि विशेष हो जाते हैं.

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चैत्र नवरात्र कब से कब तक?

चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से 02 अप्रैल तक रहेगा. 2 अप्रैल को अंतिम नवरात्र होने के साथ ही इस दिन रामनवमी भी मनाई जायेगी.

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कलश स्थापना का मुहूर्त

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 24 मार्च को दोपहर 02 बजकर 57 मिनट से 25 मार्च दिन को शाम 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगी. 25 मार्च बुधवार के दिन सुबह 58 मिनट का समय कलश स्थापना के लिए शुभ है. आप सुबह 06 बजकर 19 मिनट से सुबह 07 बजकर 17 मिनट के बीच कलश स्थापना कर सकते हैं.

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कलश स्थापना की सामग्री

कलश स्थापना में आपको एक कलश, स्वच्छ मिट्टी, थाली, कटोरी, जल, मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र, चन्दन, चौकी, लाल वस्त्र, रूई, नारियल, चावल, सुपारी, रोली, मौली, जौ, धूप, दीप, फूल, नैवेद्य, अबीर, गुलाल, केसर, सिन्दूर, लौंग, शुद्ध घी, वस्त्र, दूध, दही, गंगाजल, शहद आदि की आवश्यकता पड़ेगी.

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कलश स्थापना के नियम

प्रात:काल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर कलश स्थापना के लिए सामग्री पूजा स्थल पर एकत्र कर लें.

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एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें. 

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कलश स्थापना के लिए मिट्टी के कलश का उपयोग करना उत्तम होगा, यदि संभव नहीं है तो फिर लोटे को कलश बना सकते हैं.

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कलश की स्थापना करते समय जल में सिक्का डालें. कलश पर नारियल रखें और कलश पर मिट्टी लगाकरी जौ बोएं. कलश के निकट अखंड दीपक जरूर प्रज्ज्वलित करें.

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कलश के गले में मौली या रक्षा सूत्र बांधें और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं.

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