Vastu Tips For Money: ईशान कोण में की गईं ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जीवन में आ सकती है आर्थिक तंगी

Vastu Tips For Money: वास्तु शास्त्र में ईशान कोण को बुद्धि और मानसिक शांति का केंद्र माना गया है. इस दिशा में छोटी-सी गलती भी सोच, सेहत और फैसलों को प्रभावित कर सकती है.

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वास्तु टिप्स  (Photo: ITG) वास्तु टिप्स (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:38 AM IST

Vastu Tips For Money:  वास्तु शास्त्र में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को सिर्फ पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक और मानसिक स्वास्थ्य का केंद्र माना गया है. यदि इस दिशा में कोई भी वास्तु दोष हो तो उसका सीधा असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और सेहत पर पड़ता है. जब बुद्धि प्रभावित होती है, तो व्यक्ति सही समय पर सही फैसले नहीं ले पाता है. कई बार बिना वजह परेशानियां खड़ी हो जाती हैं और इंसान को यह भी समझ नहीं आता कि समस्याओं की जड़ कहां है.

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ईशान कोण को रखें साफ सुथरा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, ईशान कोण में मंदिर हो या न हो लेकिन यह स्थान हल्का, साफ-सुथरा और खुला होना बेहद जरूरी है. यह दिशा जितनी स्वच्छ और व्यवस्थित होगी, उतनी ही व्यक्ति की बुद्धि तेज होगी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत बनेगी.

ईशान कोण में करें इस रंग का प्रयोग

ईशान कोण में सबसे बड़ा वास्तु दोष रसोई, टॉयलेट, स्टोर रूम या लाल रंग का अत्यधिक प्रयोग माना जाता है. थोड़ी मात्रा में हल्का पीला रंग स्वीकार्य है, लेकिन अधिक पीला रंग बुद्धि को कुंद करता है और लाल रंग की अधिकता क्रोध और चिड़चिड़ेपन को बढ़ाती है. यदि इस दिशा में स्टोर रूम हो, तो व्यक्ति को हमेशा मानसिक बोझ महसूस होता है और पारिवारिक रिश्तों में भी तनाव बना रहता है. कुछ मामलों में ऐसे घरों में जन्म लेने वाले बच्चों में मानसिक असंतुलन की समस्या भी देखी जाती है.

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ईशान कोण और मंदिर से जुड़े जरूरी वास्तु नियम

1. ईशान कोण में बने मंदिर में लाल रंग का अधिक प्रयोग न करें. भगवान के वस्त्रों को छोड़कर दीवारों या सजावट में लाल रंग से बचें.

2. इस दिशा में हल्का नीला, हरा, सफेद या क्रीम रंग शुभ माने जाते हैं. ईशान कोण मंदिर के लिए सबसे उत्तम दिशा है, लेकिन यदि यहां मंदिर न हो तो भी जगह को साफ और खाली रखें. दक्षिण-पश्चिम दिशा में मंदिर नहीं बनाना चाहिए.

3. पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए. भगवान की मूर्तियां भी पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके रखें.

4. मंदिर बहुत अधिक सजावटी न हो. सरल, साफ और व्यवस्थित रखें. टूटी-फूटी मूर्तियां या फटी हुई तस्वीरें न रखें.

5. मंदिर में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए. अगरबत्ती या दीपक से इतना धुआं न हो कि वातावरण भारी लगे.

6. पूजा में उपयोग होने वाली वस्तुएं जैसे दीपक, घंटी, माला आदि केवल पूजा के लिए ही रखें. मंदिर के पास बाथरूम या सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए.

7. मंदिर में बासी फूल या पुराना प्रसाद न रखें.

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