Vastu Tips For Bedroom: घर में सब कुछ सामान्य रहता है, लेकिन जैसे ही पति-पत्नी बेडरूम में पहुंचते हैं, छोटी-छोटी बातों पर तकरार शुरू हो जाती है. बाहर दोनों एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, रिश्ते में तालमेल भी ठीक रहता है, फिर भी कमरे के अंदर माहौल बदल जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो एक बार अपने बेडरूम की दिशा जरूर जांच लें.
कहीं आपका बेडरूम साउथ-ईस्ट-साउथ (East-South-East) दिशा में तो नहीं है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में बना बेडरूम दंपत्ति के बीच बेवजह की बहस को बढ़ा सकता है. खासतौर पर तब, जब सोते समय सिर इसी दिशा की ओर हो. कई बार झगड़े के बाद खुद महसूस होता है कि बात इतनी बड़ी थी ही नहीं, लेकिन उस समय स्थिति संभल नहीं पाती है. यदि आप अविवाहित हैं, तो इस दिशा में अधिक समय बिताना बेचैनी या एंग्जायटी जैसी स्थिति पैदा कर सकता है.
क्यों होती है ईस्ट-साउथ-ईस्ट दिशा में बहस?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह दिशा 'मंथन' यानी गहन सोच-विचार की मानी जाती है. यहां अधिक समय बिताने से व्यक्ति ओवरथिंकिंग करने लगता है. दिमाग लगातार किसी न किसी विषय पर घूमता रहता है, कभी पुरानी बातें, तो कभी बेवजह के संदेह. इसी कारण रिश्तों में शक और अनावश्यक चिंतन बढ़ सकता है. जब एक ही विषय पर बार-बार विचार होता है, तो छोटी बातें भी बड़ी लगने लगती हैं. यही वजह है कि इस दिशा में बना बेडरूम दांपत्य जीवन में तनाव का कारण बन सकता है.
किन लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है यह दिशा?
हर दिशा हर किसी के लिए नकारात्मक नहीं होती. रिसर्च या गहन अध्ययन से जुड़े विद्यार्थियों के लिए इस दिशा में बैठकर काम करना लाभदायक माना जाता है. यदि किसी विषय पर उलझन हो और निर्णय समझ न आ रहा हो, तो कुछ समय के लिए इस दिशा में बैठना स्पष्टता दे सकता है.
ईस्ट-साउथ-ईस्ट दिशा में क्या रखें और क्या नहीं?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आपकी रसोई अग्नि कोण में है, तो इस दिशा में मिक्सी रखने की जगह बनाना उचित माना जाता है. वॉशिंग एरिया भी यहां अच्छा माना जाता है, जो मानसिक हलचल को संतुलित करने में सहायक हो सकता है. लेकिन, इस दिशा में लाल, पीला और ग्रे रंग का अत्यधिक प्रयोग वास्तु दोष बढ़ा सकता है.
अंशु पारीक