Somnath Temple: गुजरात का प्रसिद्ध सोमनाथ धाम सनातन मय है. हर ओर उत्साह नजर आ रहा है. यहां 8 से 11 जनवरी तक स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व महमूद गजनवी के पहले आक्रमण और मंदिर के बार-बार ध्वस्त होने व पुनर्निर्माण की 1000 साल पुरानी कहानी को बयां करता है. ऐसे में भक्तों का उत्साह चरम पर है. चारों ओर खुशी की लहर है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस अवसर पर यहां पहुंचे हैं.
11 जनवरी को सुबह सोमनाथ महादेव का महाअभिषेक किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे. इसके बाद मंदिर में सोमनाथ महादेव की महाआरती होगी. आइए इसी कड़ी में आपको आज सोमनाथ मंदिर से जुड़ी पांच प्रमुख बातें बताते हैं.
सोमनाथ मंदिर की मुख्य बातें
1. जानकारों के अनुसार सोमनाथ मंदिर को चालुक्य शैली में बनाया गया है. इसका निर्माण पीले बलुआ पत्थर से किया गया है. सोमनाथ मंदिर का शिखर करीब 155 फीट ऊंचा है. सोने का कलश और विशाल मंडपम इस मंदिर का आकर्षण और बढ़ा देते हैं.
2. शास्त्रों में 12 ज्योतिर्लिंगों का जिक्र है, लेकिन जब भी इनकी गणना शुरू होती है तो सोमनाथ का नाम सबसे पहले आता है. "सौराष्ट्रे सोमनाथं च..." सोमनाथ मंदिर को ही भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग माना गया है.
3. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ का मूल मंदिर स्वयं चंद्रदेव ने सोने से बनवाया था. बाद में इसे सूर्यदेव ने चांदी से बनवाया. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने लकड़ी और आखिर में सोलंकी राजपूत शासकों ने इसे पत्थर से भव्य रूप प्रदान किया.
4. सोमनाथ मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है. हजारों सालों में इसे बार-बार मिटाने की कोशिश हुईं. लेकिन ये मंदिर हर बार बिखरकर संवरता गया. मान्यता है कि सोमनाथ मंदिर करीब 17 बार लूटा और तोड़ा गया. महमूद गजनवी ने भी इस पर कई बार हमले किए. लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो हिन्दू आस्था की दृढ़ता दिखाता है.
5. मान्यता है कि इस मंदिर परिसर में एक विशेष स्तंभ स्थित है, जिसे बाणस्तंभ कहा जाता है. यह स्तंभ अत्यंत प्राचीन माना जाता है और मंदिर के जीर्णोद्धार के समय इसका भी संरक्षण किया गया. जानकारों की मानें तो यह एक दिशासूचक स्तंभ है, जिस पर समुद्र की दिशा में बना तीर अंकित है. इस स्तंभ पर संस्कृत में लिखा है— “आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत, अबाधित ज्योर्तिमार्ग.”
इसका मतलब है कि समुद्र के इस अंतिम छोर से लेकर दक्षिण ध्रुव तक प्रकाश का मार्ग पूरी तरह निर्बाध है. सरल शब्दों में कहा जाए तो सोमनाथ मंदिर के इस बिंदु से यदि दक्षिण ध्रुव यानी अंटार्कटिका तक सीधी रेखा खींची जाए, तो बीच में कोई भी भू-भाग या पर्वत नहीं आता है.
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