Shri Devkinandan Thakur Ji: पीरियड्स में मंदिर जाना चाहिए या नहीं, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने दिया जवाब

Shri Devkinandan Thakur Ji: हिंदू धर्म में मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ और मंदिर जाने की मनाही क्यों है? आइए मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर से जानते हैं कि मासिक धर्म में महिलाओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए.

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पीरियड्स के नियम (Photo: ITG) पीरियड्स के नियम (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST

Shri Devkinandan Thakur Ji: मासिक धर्म यानी पीरियड्स को लेकर हिंदू धर्म में अनेकों परंपराएं और मान्यताएं चली आ रही हैं. कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के मुताबिक, इस दौरान महिलाओं को मंदिर नहीं जाना चाहिए, पूजा नहीं करनी चाहिए. मासिक धर्म से जुड़े इन नियमों का पालन आज के दौर की महिलाएं भी करती हैं. लेकिन इन बातों को नकारात्मक नजरिए से देखने के बजाय एक अलग दृष्टिकोण से समझना जरूरी है.

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दरअसल, पहले के समय में मासिक धर्म के ये नियम इसलिए बनाए गए थे ताकि महिलाओं को इन दिनों में पूरा आराम मिल सके. क्योंकि पीरियड्स में महिलाओं का शरीर एकदम कमजोर हो जाता है. उस समय घर की जिम्मेदारियां बहुत होती थीं और महिलाएं सुबह से लेकर रात तक लगातार काम करती रहती थीं. ऐसे में ये 3 से 4 दिन उनके लिए आराम के दिन होते थे. कहा जाता है कि चौथे दिन स्नान करने के बाद महिला फिर से सामान्य कार्यों में लौट सकती है, जैसे रसोई का काम या परिवार की देखभाल आदि. लेकिन, धार्मिक कार्यों यानी पूजा-पाठ वगैरह में पांचवें दिन से ही महिलाओं को शामिल होना चाहिए. 

शास्त्रों में पीरियड्स का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख भी मिलता है कि पीरियड्स के दिनों के बाद शुद्धता के साथ दिनचर्या में वापस लौटना चाहिए. हालांकि, समय के साथ इन नियमों को लेकर अलग-अलग मत सामने आए हैं. आज के समय में जरूरी है कि हम इन परंपराओं को समझदारी और सम्मान के साथ देखें, न कि अंधविश्वास या दबाव के रूप में. हर महिला की स्थिति, सेहत और सोच अलग होती है, इसलिए उसे यह निर्णय खुद लेने का अधिकार होना चाहिए कि वह क्या फॉलो करना चाहती है.

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किसी भी व्यक्ति या विचार से दूरी बनाना या जुड़ना, यह पूरी तरह व्यक्तिगत समझ और परिस्थितियों पर निर्भर करता है. हमें दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए, लेकिन सही-गलत का निर्णय सोच-समझकर ही लेना चाहिए. चलिए कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर से जानते हैं कि महिलाओं को इस समय कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

1. पूजा-पाठ से दूरी

मान्यता के अनुसार, पीरियड्स में मंदिर जाना, मूर्ति को स्पर्श करना या नियमित पूजा-पाठ करना टालना चाहिए. दरअसल, इस समय में शरीर को विश्राम मिलना चाहिए. धार्मिक शुद्धता के नियम अपनाने चाहिए क्योंकि शास्त्रों में इस बात उल्लेख मिलता है. 

2. मंदिर में प्रवेश से बचना

कई परंपराओं में माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहिए. हालांकि, आज के समय में कई लोग इसका व्यक्तिगत आस्था और सुविधा के मुताबिक पालन करते हैं. 

3. रसोई में पूजा का भोजन (भोग) न बनाना

रसोई में काम करना या न करना परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है. लेकिन, धार्मिक दृष्टि से भगवान का भोग या प्रसाद बनाने से दूरी रखने की सलाह दी जाती है. 

4. धार्मिक वस्तुओं को स्पर्श न करना

पीरियड्स के दौरान, मूर्ति, पूजा की थाली, धार्मिक ग्रंथ या अन्य पवित्र वस्तुओं को छूने से बचना चाहिए. यह भी शुद्धता से जुड़ी पारंपरिक सोच का हिस्सा है.

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