शनि नवग्रहों में सबसे धीमी चाल चलने वाला ग्रह है. शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहता है. फिलहाल शनि मीन राशि में है. इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है. जबकि कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा और मेष राशि पर तीसरा चरण जाती है. ज्योतिषविदों की मानें तो शनि की साढ़ेसाती जातक को कई तरह की परेशानियां देती हैं. लेकिन कष्ट कितने ज्यादा होंगे, ये साढ़ेसाती के चरण से ही तय होता है. आइए जानते हैं कि शनि की साढ़ेसाती का कौन सा चरण सबसे कष्टकारी होता है और उक्त राशियों से साढ़ेसाती का प्रभाव पूरी तरह से कब समाप्त होगा.
साढ़ेसाती का पहला चरण
मेष राशि पर शनि की साढे़साती का पहला चरण चल रहा है. इस राशि पर साल 2032 तक शनि की साढेसाती रहने वाली है. साढ़ेसाती का आरंभिक चरण आमतौर पर कठिन ही माना जाता है. ऐसे में शनि का प्रभाव जीवन में अचानक बदलाव लेकर आता है. नौकरी में ट्रांसफर की संभावना बनती है. खर्चों में अचानक से बढ़ोतरी आती है. सिरदर्द या आंखों से जुड़ी समस्या रहने लगती है. माता-पिता का स्वास्थ्य व्यक्ति के लिए चिंता का विषय बन जाता है.
उपाय: शनि की साढ़ेसाती के पहले चरण में हनुमान जी की पूजा करना लाभकारी माना जाता है.
साढ़ेसाती का दूसरा चरण
मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है. इस राशि पर वर्ष 2029 तक साढ़ेसाती रहेगी. साढ़ेसाती का दूसरा चरण सबसे कष्टकारी माना जाता है. इसमें व्यक्ति के संघर्ष का स्तर बहुत बढ़ जाता है. करियर के मोर्चे पर व्यक्ति को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. नौकरी या व्यवसाय से जुड़े फैसलों बड़ी सावधानी से लेने पड़ते हैं. दांपत्य जीवन में टकराव और अनबन की संभावना अधिक रहती है. सफलता पाने के लिए अत्यधिक प्रयास करना पड़ता है.
उपाय- साढ़ेसाती के इस चरण में दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली अपनाने से व्यक्ति को राहत मिलती है.
साढ़ेसाती का तीसरा
कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का तीसरा चरण चल रहा है, जो कि अगले वर्ष 2027 में समाप्त होने वाला है. साढ़ेसाती के इस चरण में जातक को मुख्य रूप से स्वास्थ्य और आर्थिक संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. रोग-बीमारी व्यक्ति या उसके परिवार को घेरे रखती है. पुराने रोग अचानक से सक्रिय हो जाते हैं. रुपए-पैसे के मामले में भी स्थिति डांवाडोल रहती है. धन कहीं अटक सकता है, इसलिए कर्ज का लेन-देन कभी नहीं करना चाहिए. निवेश के मामलों में भी सोच-समझकर निर्णय लेने चाहिए.
उपाय- साढ़ेसात की इस अवधि में शनि देव की आराधना और सात्विक आचरण से सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं.
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