'बाबा का बुलावा आते ही नतमस्तक हो जाता हूं', साईं की शरण में राघव चड्ढा

राघव चड्ढा ने शिरडी आकर साईं बाबा का आशीर्वाद लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बहुत कृपालु हैं. मैं बस यही प्रार्थना करता हूं कि सबके जीवन में सुख-शांति बनी रहे. सब फलें-फूलें. देश भी तरक्की करे, आगे बढ़े. बाबा सब लोगों को रोग-मुक्त रखें और देश के कोने-कोने तक खुशहाली फैले.

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बाबा का बुलावा आते ही मैं फ्लाइट या गाड़ी पकड़कर शिरडी पहुंच जाता हूं: राघव चड्ढा (Photo: ITG) बाबा का बुलावा आते ही मैं फ्लाइट या गाड़ी पकड़कर शिरडी पहुंच जाता हूं: राघव चड्ढा (Photo: ITG)

नितिन मिराणे

  • शिरडी,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:49 PM IST

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शिरडी पहुंचकर साईं बाबा के दरबार में माथा टेका और देश की सुख-शांति व खुशहाली की कामना की. उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें भीतर से बाबा का बुलावा महसूस होता है, वह बिना देर किए शिरडी पहुंच जाते हैं. इस दौरान राघव चड्ढा ने आम लोगों के मुद्दे उठाने और उनके समाधान के लिए लगातार काम करते रहने की बात भी कही.

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शिरडी वाले साईं बाबा के दर्शन के बाद राघव चड्ढा ने कहा कि मैं साईं बाबा के दरबार में आकर नतमस्तक होने की कोशिश करता रहता हूं. मुझे जब भी थोड़ी फुर्सत मिलती है या अंदर से भाव आता है कि बाबा का बुलावा आया है तो मैं फ्लाइट या गाड़ी पकड़कर सीधे शिरडी पहुंच जाता हूं. फिर चाहे मैं देश के किसी भी कोने में हूं. बस यहां आकर बाबा के दरबार में नतमस्तक हो जाता हूं. बाबा मेरा मार्गदर्शन करते हैं. उन्हीं के मार्गदर्शन से मैं काम कर रहा हूं.

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि बाबा बहुत दयालु हैं. बहुत कृपालु हैं. मैं बस यही प्रार्थना करता हूं कि सबके जीवन में सुख-शांति बनी रहे. सब फलें-फूलें. देश भी तरक्की करे, आगे बढ़े. बाबा सब लोगों को रोग-मुक्त रखें और देश के कोने-कोने तक खुशहाली फैले. उन्होंने कहा कि मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूं कि बाबा ने मुझे हर बार विशेष प्यार दिया है. विशेष आशीर्वाद दिया है और अपना हाथ सदैव मेरे सिर पर बनाए रखा है.

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जनता के मुद्दे उठाता रहूंगा
इस दौरान राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि देश की जनता के मुद्दे मैं पहले भी उठाता रहा था और आगे भी उठाता रहूंगा. अच्छी बात यह है कि अब सिस्टम के भीतर आकर उन समस्याओं का समाधान भी ढूंढ पाऊंगा. राघव चड्ढा ने कहा कि मेरी तो पूरी यात्रा ही लोगों के मुद्दे उठाकर उनका समाधान ढूंढने की रही है. मेरी यह यात्रा आगे भी यूं ही जारी रहेगी.

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