Premanand Maharaj: सोशल मीडिया के दौर में आस्था भी डिजिटल दुनिया का ही एक हिस्सा बन गई है. आजकल लोग कथावाचकों और संतों की बातें सुनकर मंदिरों के दर्शन काट रहे हैं, लेकिन उनके मन में कोई शुद्ध विचार नहीं है. इतना ही नहीं आजकल लोग मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं और वहां की तस्वीरें और वीडियो सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हैं.
कई बार यह श्रद्धा से ज्यादा दिखावे का रूप ले लेता है, इसी की वजह से अब मंदिरों में खासतौर पर नोट भी चिपका होता है कि मंदिरों में मोबाइल का इस्तेमाल निषेध है ताकि लोग भगवान की फोटो क्लिक करने की बजाय उनका ध्यान करें.इसी विषय पर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में एक अहम संदेश दिया, जो तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा में बना हुआ है.
प्रेमानंद महाराज ने कहा, 'मंदिर जाते हो और पाप करते हो, मंदिर जाते हो चोरी, नशा, हिंसा, बेविचार करते हो, गंदी बात करते हो... कुछ नहीं होगा नर्क जाओगे. जप नाम करते हो, कोई गलत आचरण नहीं आपकी अच्छी सतगति होगी, भगवान सबसे पहले हमारे मन में विराजमान होते हैं.
अगर व्यक्ति के विचार शुद्ध नहीं हैं, तो वह चाहे कितनी भी बार मंदिर चला जाए, उसे आत्मिक शांति नहीं मिल सकती. महाराज ने कहा कि जब हमें अपने भीतर बसे भगवान से ही परिचय नहीं है, तो बाहर मंदिर में मौजूद भगवान से सच्चा संबंध कैसे बनेगा?
उन्होंने आगे कहा, 'खूब नाम जप करो... मन करे तो मंदिर जाएं, पूजा करें, परिक्रमा करें, लेकिन अगर मन नहीं है तो केवल दिखावे के लिए जाना जरूरी नहीं. व्यक्ति का असली कल्याण भगवान के नाम स्मरण से ही होता है. मंदिर जा रहे हो गंदी बातें देख रहे हो, माता-बहन की तरह गंदी नजर है. दोष दर्शन कर रहे हो मंदिर के दर्शन कर रहे हो ठाकुर जी के या दोष दर्शन कर रहे हो, श्रीजी के दर्शन कर रहे हो या व्यवहार का दर्शन कर रहे हो.'
खास बात यह है कि आपका चिंतन क्या है, आपका चिंतन सही तो सब सही है. हमें अपने मन की बात संभालनी चाहिए, हमारा चिंतन सही होना चाहिए. नाम जप करना चाहिए, फिर चाहे आप मंदिर में बैठो या श्मशान में बैठे हो, सब बढ़िया बात है. अगर भगवान का नाम जप चल रहा हो तो जहां हो वो ही मंदिर है, अगर भगवान का चिंतन नहीं चल रहा है तो मंदिर में जाकर भी आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलेगा.
प्रेमानंद महाराज का यह संदेश आज के समय में बेहद जरूरी है. यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, बल्कि हमारे आचरण, सोच और कर्मों में होनी चाहिए. भगवान का नाम जप, शुद्ध विचार और सही व्यवहार ही इंसान को सही रास्ते पर ले जाते हैं.
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