Premanand Maharaj: अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि भगवान का नाम जप करने के लिए क्या कोई खास स्थान या नियम जरूरी है या नहीं. खासकर बिस्तर या शौचालय जैसे स्थानों को लेकर कई तरह की कंफ्यूजन लोगों में है.
धार्मिक मान्यताओं में बताया गया है कि नाम जप और गुरु मंत्र जप दोनों अलग होते हैं और इनके नियम भी अलग-अलग माने गए हैं. इन्हीं बातों को लेकर इन दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है, जिसमें प्रेमानंद महाराज से एक महिला यही सवाल पूछती दिखाई देती है कि क्या बिस्तर पर बैठकर नाम जप करना सही माना जाता है या नहीं.
नाम जप कहां करें?
इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने बहुत साफ और आसान भाषा में जवाब दिया है. उनका कहना है कि भगवान का नाम लेने के लिए कोई खास जगह या स्थिति जरूरी नहीं होती है. इंसान किसी भी अवस्था में चाहे वह शुद्ध हो या अशुद्ध
भगवान का स्मरण कर सकता है.
शास्त्रों में भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति हर स्थिति में भगवान को याद करता है, तो वह अंदर और बाहर दोनों तरह से शुद्ध हो जाता है. इसी वजह से नाम जप पर कोई पाबंदी नहीं मानी गई है. आप बिस्तर पर बैठे हों या कहीं भी, यहां तक कि शौचालय में भी भगवान का नाम लिया जा सकता है.
गुरु मंत्र के नियम
हालांकि, महाराज जी यह भी बताते हैं कि नाम जप और गुरु मंत्र जप एक जैसे नहीं होते हैं. गुरु मंत्र जप के लिए कुछ नियम और मर्यादाएं तय की गई हैं. जैसे जिस बिस्तर पर रोजमर्रा का जीवन चलता है, वहां बैठकर गुरु मंत्र का जप नहीं करना चाहिए. इसी तरह अशुद्ध जगहों पर भी गुरु मंत्र जप से बचने की सलाह दी जाती है. लेकिन, भगवान का नाम लेना हर समय संभव है और इस पर कोई रोक नहीं है. लेकिन जब बात गुरु मंत्र की आती है, तो उसमें शुद्धता और नियमों का पालन जरूरी होता है.
अंत में यही समझ आता है कि नाम जप मन को शांत करता है, आत्मा को शुद्ध करता है और इंसान को भगवान के करीब ले जाता है. इसलिए नाम जप को किसी भी स्थिति में किया जा सकता है.
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