Premanand Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के विचार और प्रवचन लोगों को सही राह दिखाने का काम करते हैं. प्रेमानंद महाराज का मानना है कि हमारी जिंदगी में आने वाली कई परेशानियां हमारी खुद की कुछ गलतियों की वजह से होती हैं. कई बार हम अनजाने में अपनी कुछ बेहद निजी बातें दूसरों के सामने जाहिर कर देते हैं, जिससे हमारे बनते काम बिगड़ने लगते हैं और हम लोगों की बुरी नजर या नेगेटिव एनर्जी के शिकार हो जाते हैं. प्रेमानंद महाराज ने अपने एक प्रवचन में ऐसी 7 बातों का जिक्र किया है, जिन्हें हमेशा राज रखना चाहिए ताकि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे.
1. भविष्य के प्लान और गोल्स
महाराज जी का कहना है कि अपनी जिंदगी के बड़े लक्ष्यों और भविष्य की प्लानिंग को तब तक किसी से साझा न करें, जब तक कि वे पूरे न हो जाएं. वक्त से पहले अपने इरादों का ढिंढोरा पीटने से काम में बाधाएं आ सकती हैं.
2. अपनी कमजोरी या सीक्रेट्स
आज के दौर में हर इंसान भरोसे के लायक नहीं होता. प्रेमानंद जी के अनुसार, कभी भी किसी गलत या बाहरी व्यक्ति के सामने अपनी कमजोरी जाहिर न करें. लोग वक्त आने पर आपकी इसी कमजोरी का गलत फायदा उठा सकते हैं.
3. रिश्ते और परिवार की निजी बातें
पति-पत्नी के बीच के रिश्ते और परिवार की अंदरूनी बातें हमेशा घर की चारदीवारी के भीतर ही रहनी चाहिए. इन बातों को दूसरों को बताने से आपसी दूरियां बढ़ती हैं और बाहरी लोगों की बुरी नजर भी लगती है.
4. अपना दुखड़ा हर किसी के सामने न रोएं
अपनी निजी परेशानियां और दुख हर किसी को बताने से बचना चाहिए. महाराज जी कहते हैं कि दुनिया में ज्यादातर लोग आपके दुख का मजाक उड़ाएंगे या उसका लाभ उठाएंगे. अपनी तकलीफें सिर्फ भगवान के सामने रखें.
5. पैसों और सफलता का घमंड
धन-दौलत और कामयाबी को जितना शांत और छिपाकर रखा जाए, उतना ही अच्छा होता है. पैसों या तरक्की का जरूरत से ज्यादा दिखावा करने पर लोगों में आपके प्रति ईर्ष्या (जलन) पैदा होती है, जो नकारात्मकता को न्योता देती है.
6. पूजा-पाठ और भक्ति का दिखावा
भक्ति का प्रदर्शन कभी नहीं करना चाहिए. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, ईश्वर की आराधना हमेशा सच्चे और शांत मन से एकांत में होनी चाहिए. पूजा-पाठ और दान-पुण्य का दिखावा करने से उसका आध्यात्मिक फल नष्ट हो जाता है.
7. अपने अच्छे कर्मों को छिपाएं
अगर आपने किसी की मदद की है या कोई नेक काम किया है, तो उसका शोर कभी मत मचाइए. महाराज जी कहते हैं कि गुप्त रूप से किए गए अच्छे कर्म और सेवा भाव ही भगवान को सबसे ज्यादा प्रिय होते हैं और उनका शुभ फल मिलता है.
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