Premanand Maharaj: शिक्षिका ने पूछा- किन लोगों के पैर छूने से होता है पुण्य का नाश? क्या बोले प्रेमानंद महाराज

Premanand Maharaj: बच्चों को यह सिखाया जाता है कि अपने गुरु या किसी विद्वान व्यक्ति के प्रति हमेशा आदर और श्रद्धा रखें. इसी भाव से अक्सर लोग अपने शिक्षकों या बुजुर्गों के पैरों को छूते हैं. लेकिन समय-समय पर यह सवाल उठता है कि क्या पैर छूने से पुण्य नष्ट हो जाता है?

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प्रेमानंद जी महाराज (Photo: instagram/bhajanmarg) प्रेमानंद जी महाराज (Photo: instagram/bhajanmarg)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

Premanand Ji Maharaj: हिंदू धर्म में गुरु को बहुत उच्च स्थान दिया गया है. गुरुओं को भगवान का रूप माना जाता है और यह सिखाया जाता है कि उनका हमेशा सम्मान और आदर करना चाहिए. छोटे बच्चों को भी यही शिक्षा दी जाती है कि अपने शिक्षक के प्रति श्रद्धा और विनम्रता रखनी चाहिए. इसी श्रद्धा के चलते अक्सर छात्र अपने शिक्षकों के पैरों को छूते हैं. लेकिन समय-समय पर यह भी प्रश्न उठता है कि क्या किसी के पैर छूने से उनके पुण्य पर कोई असर पड़ता है?

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महिला शिक्षिका का सवाल

एक महिला शिक्षिका ने इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज से सवाल किया. उन्होंने बताया कि कई बार उनके छात्र आदर दिखाने के लिए उनके पैरों को छूते हैं. उन्होंने कई बार मना भी किया, लेकिन बच्चे नहीं मानते. इस बात को लेकर उन्हें चिंता थी कि कहीं उनके पुण्य पर इसका उल्टा असर तो नहीं पड़ता.

प्रेमानंद जी महाराज का जवाब

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि आम तौर पर बिना ध्यान के किसी के पैर छूने से पुण्य पर असर पड़ सकता है. लेकिन इसका आसान और आध्यात्मिक तरीका भी है. उनका कहना है कि अगर शिक्षक अपने मन में भगवान को याद करते हुए बच्चे को प्रणाम कर लें, तो पुण्य सुरक्षित रहता है. हर व्यक्ति में भगवान का अंश होता है, इसलिए किसी से अपने पैरों का संपर्क बिना सोच-समझे नहीं होना चाहिए.

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श्रद्धा और सम्मान दोनों बनाए रखें

महाराज ने यह भी बताया कि श्रद्धा और सम्मान दोनों को बनाए रखना बिल्कुल संभव है. अगर कोई व्यक्ति आपकी मना करने के बावजूद आदर के साथ आपको प्रणाम करता है और आपके पैरों को छूता है, तो आप अपने मन में भगवान को याद करते हुए उसे प्रणाम कर दें. इससे आपका पुण्य भी सुरक्षित रहेगा और सामने वाले का सम्मान भी बना रहेगा.

आध्यात्मिक दृष्टि से पुण्य और आदर

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से श्रद्धा और पुण्य दोनों एक साथ बनाए रखे जा सकते हैं. गुरु को हमेशा आदर देना चाहिए, लेकिन साथ ही अपने मन की शांति और पुण्य की सुरक्षा भी जरूरी है. हर इंसान में भगवान रहते हैं, इसलिए हमेशा विनम्र और सजग होकर व्यवहार करना चाहिए.

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