Pitru Paksha 2026: 2026 में कब से शुरू होगा पितृपक्ष? अभी देख लें पितरों के श्राद्ध की तिथियां

साल 2026 में पितृपक्ष का आरंभ 26 सितंबर से होगा और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा. इन 16 दिनों में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा. कहते हैं कि पितृपक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध करने से उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है.

Advertisement
पितृपक्ष में पितरों की मृत्यु तिथि के आधार पर उनका श्राद्ध किया जाता है. पितृपक्ष में पितरों की मृत्यु तिथि के आधार पर उनका श्राद्ध किया जाता है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

Pitru Paksha 2026: नए साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा और इसका समापन 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या पर होगा. इन सोलह दिनों में लोग अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करेंगे. कहते हैं कि श्राद्धपक्ष में हमारे पूर्वज हमें आशीर्वाद देने धरती पर उतरते हैं. इसलिए उनका तर्पण और पिंडदान करने से जीवन में चल रही हर बाधा दूर हो जाती है. आइए जानते हैं कि साल 2026 में पितरों के श्राद्ध की तिथि क्या रहने वाली हैं.

Advertisement

पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथियां
शनिवार, 26 सितम्बर 2026- पूर्णिमा श्राद्ध
रविवार, 27 सितम्बर 2026- प्रतिपदा श्राद्ध
सोमवार, 28 सितम्बर 2026- द्वितीया श्राद्ध
मंगलवार, 29 सितम्बर 2026- तृतीया श्राद्ध
मंगलवार, 29 सितम्बर 2026- महाभरणी श्राद्ध
बुधवार, 30 सितम्बर 2026- चतुर्थी श्राद्ध    
बुधवार, 30 सितम्बर 2026- पंचमी श्राद्ध
बृहस्पतिवार, 01 अक्टूबर 2026- षष्ठी श्राद्ध
शुक्रवार, 02 अक्टूबर 2026- सप्तमी श्राद्ध
शनिवार, 03 अक्टूबर 2026- अष्टमी श्राद्ध
रविवार, 04 अक्टूबर 2026- नवमी श्राद्ध
सोमवार, 05 अक्टूबर 2026- दशमी श्राद्ध
मंगलवार, 06 अक्टूबर 2026- एकादशी श्राद्ध
बुधवार, 07 अक्टूबर 2026- द्वादशी श्राद्ध
बुधवार, 07 अक्टूबर 2026- मघा श्राद्ध
बृहस्पतिवार, 08 अक्टूबर 2026- त्रयोदशी श्राद्ध
शुक्रवार, 09 अक्टूबर 2026- चतुर्दशी श्राद्ध
शनिवार- 10 अक्टूबर 2026- सर्वपितृ अमावस्या

किस तिथि पर करें पूर्वजों का श्राद्ध?
सनातन परंपरा के अनुसार, पितृपक्ष में पितरों की मृत्यु तिथि के आधार पर उनका श्राद्ध किया जाता है. यदि किसी पूर्वज की मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि पर हुई है तो उनका श्राद्ध उसी तिथि पर मान्य होगा. यदि मृत्यु तिथि ज्ञान न हो तो उस पितृ का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जा सकता है. जबकि अकाल मृत्यु जैसे कि दुर्घटना या अन्य असामयिक कारणों से देह त्यागने वाले पितरों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करना उचित होता है.

Advertisement

पितृ पक्ष में न करें ये गलतियां
पितृपक्ष की सोलह दिवसीय अवधि में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है. लहसुन, प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूरी रखी जाए तो और उत्तम होगा. इस दौरान मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए. बाल कटवाना या दाढ़ी बनवाना भी वर्जित है. इस अवधि में किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. नया घर खरीदना या नया व्यवसाय शुरू करना भी वर्जित है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »