Padmini Ekadashi 2026: कब है अधिकमास की पद्मिनी एकादशी? नोट करें सही तिथि

Padmini Ekadashi 2026 Date : हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है. हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी को ये व्रत पड़ता है. ऐसे में साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है. लेकिन इस साल अधिक मास होने के कारण कुल 26 एकादशी पड़ने वाली है, जो ज्येष्ठ मास में पड़ेगी.

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पद्मिनी एकादशी 2026 (Photo: ITG) पद्मिनी एकादशी 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:31 PM IST

Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास शुरू हो चुका है और उसमें आने वाले सभी व्रत व त्योहार बहुत ही विशेष होते हैं. अधिकमास में आने वाली एकादशी का भी धार्मिक महत्व माना जाता है, जिसका नाम है पद्मिनी एकादशी. यह एकादशी हर तीन साल में एक बार ही आती है, क्योंकि यह सिर्फ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में ही पड़ती है. यही वजह है कि इसे अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है और जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिलती है.

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पद्मिनी एकादशी 2026 की तिथि

साल 2026 में पद्मिनी एकादशी 27 मई को मनाई जाएगी. व्रत का पारण 28 मई को सुबह किया जाएगा. एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 5 बजकर 10 मिनट से शुरू हो जाएगी और तिथि का समापन 27 मई की सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर होगा.

क्यों खास है पद्मिनी एकादशी?

वैसे तो हर महीने दो एकादशी आती हैं एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में. लेकिन अधिकमास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मनी या कमला एकादशी कहा जाता है. अधिक मास स्वयं ही अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए इस दौरान आने वाली एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. यह एकादशी सभी पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है. इस दिन किया गया दान कई हजार गुना फल देता है.  संतान प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है

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पद्मिनी एकादशी व्रत के लाभ

इस व्रत करने से जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है. सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. संतान सुख की प्राप्ति के योग बनते हैं. मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

व्रत और पूजा की सरल विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और घर के मंदिर की साफ-सफाई करें. इसके बाद पूजा के लिए एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. फिर, गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें. तिलक लगाएं और अक्षत (पीले चावल) अर्पित करें. भगवान विष्णु को पीले फल और मां लक्ष्मी को लाल पुष्प चढ़ाएं. धूप-दीप जलाकर आरती करें. फिर, 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें. 

दान का महत्व

इस दिन दान का विशेष महत्व होता है. आप अपनी क्षमता अनुसार इस दिन चावल, दाल, आटा, नमक, घी, मौसमी फल और वस्त्र,  किसी जरूरतमंद को दान कर सकते हैं. अगर संभव हो तो उसी दिन करें, नहीं तो पारण से पहले अगले दिन भी दान कर सकते हैं.

किन बातों का रखें ध्यान?

- वाणी और मन को शुद्ध रखें
- किसी से विवाद या झगड़ा न करें
- सात्विक भोजन ही ग्रहण करें
- तुलसी दल का उपयोग भगवान को भोग में अवश्य करें
- अधिक से अधिक समय भजन और पूजा में बिताएं

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