Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि की रात पूजन के लिए मिलेगा 51 मिनट का शक्तिशाली मुहूर्त, जानें कब है ‘निशिता काल’

Maha Shivratri 2026: इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी. तो जानते हैं कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की तिथि, निशीथ काल का सही समय, चार प्रहर पूजा का महत्व और शिवलिंग अभिषेक की आसान विधि क्या रहने वाली है.

Advertisement
महाशिवरात्रि की सही तिथि और तारीख को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है महाशिवरात्रि की सही तिथि और तारीख को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:20 AM IST

Maha Shivratri 2026: साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की यह पावन रात भगवान शिव को समर्पित होती है. मान्यता है कि इसी शुभ रात में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन को शिवभक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं. यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि साधना, संयम और आत्मशुद्धि का अवसर माना जाता है.

Advertisement

2026 की महाशिवरात्रि क्यों मानी जा रही है विशेष?

ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार कुछ शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो पूजा-पाठ के फल को और प्रभावशाली बना सकता है. कहा जा रहा है कि इस दिन की उपासना मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आर्थिक स्थिरता देने वाली हो सकती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव ने इसी दिन गृहस्थ जीवन की शुरुआत की थी, इसलिए यह दिन दांपत्य जीवन के लिए भी शुभ माना जाता है.

निशीथ काल का महत्व

15 फरवरी की रात लगभग 12 बजकर 09 मिनट से लेकर 1 बजकर 01 मिनट तक का समय विशेष पूजा के लिए उत्तम माना गया है. इस दौरान शिवलिंग पर अभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि आधी रात का यह समय शिव साधना के लिए सबसे पवित्र होता है.

Advertisement

चार प्रहर की पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि पर रातभर जागकर चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है.

पहला प्रहर (शाम 6 बजकर 11 मिनट लेकर रात 9 बजकर 23 मिनट तक)

दूसरा प्रहर (रात 9 बजकर 23 मिनट से लेकर 16 फरवरी रात 12 बजकर 35 मिनट तक)

तीसरा प्रहर (रात 12 बजकर 35 मिनट से तड़के 3 बजकर 47 मिनट तक

चौथा प्रहर (तड़के 3 बजकर 47 मिनट मिनट से – सुबह 6 बजकर 59 मिनट तक

किन लोगों के लिए खास है यह रात?

जिन लोगों को मानसिक तनाव रहता है या जिनकी कुंडली में चंद्रमा से जुड़े दोष बताए जाते हैं, उनके लिए शिव पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है. शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोग भी इस दिन शिव आराधना कर राहत की कामना करते हैं, क्योंकि शिव को ‘महाकाल’ कहा गया है.

महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि

महाशिवरात्रि पर सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें. दिनभर फलाहार या उपवास रखें. रात में शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक करें और 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें. विवाहित महिलाएं माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित कर सुखी दांपत्य की कामना कर सकती हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement