Kitchen Vastu: किचन में चप्पल पहनकर बनाते हैं खाना? यह आदत ला सकती है आर्थिक तंगी

Kitchen Vastu :रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की पवित्रता और समृद्धि का केंद्र मानी जाती है. मान्यता है कि जहां अन्न का सम्मान होता है, वहां देवी लक्ष्मी और अन्नपूर्णा का वास होता है. इसलिए रसोई में जूते-चप्पल पहनकर जाना अशुभ माना जाता है.

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किचन के जरूरी वास्तु नियम किचन के जरूरी वास्तु नियम

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

Kitchen Vastu :वास्तु शास्त्र में किचन को सबसे पवित्र जगह कहा गया है. यहां सिर्फ खाना नहीं बनता, बल्कि पूरे परिवार की सेहत, खुशहाली और पॉजिटिव एनर्जी भी यहीं से जुड़ी होती है. पुराने समय से ही ये मान्यता रही है कि जहां अन्न का सम्मान होता है, वहां लक्ष्मी जी और माता अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है. इसलिए रसोई को साफ-सुथरा और पवित्र रखना बहुत जरूरी माना जाता था.

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लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम कई छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. जैसे कि चप्पल या जूते पहनकर रसोई में जाना. देखने में ये छोटी बात लगती है, लेकिन वास्तु के हिसाब से इसका असर घर के माहौल पर पड़ सकता है.

रसोई में चप्पल क्यों नहीं पहननी चाहिए?

वास्तु के अनुसार रसोई पॉजिटिव एनर्जी का मुख्य स्रोत होती है. यहां बनने वाला खाना पूरे परिवार को ऊर्जा देता है. जूते-चप्पल बाहर की गंदगी, धूल और नकारात्मकता लेकर आते हैं. ऐसे में अगर इन्हें पहनकर रसोई में जाते हैं, तो माना जाता है कि इससे रसोई की पवित्रता कम हो जाती है.

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इससे माता अन्नपूर्णा और लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं. इसका असर घर के माहौल पर भी दिखने लगता है, जैसे छोटी-छोटी बातों पर झगड़े, तनाव या मन की अशांति. कुछ लोग तो इसे आर्थिक दिक्कतों से भी जोड़कर देखते हैं. इसलिए बेहतर यही है कि रसोई में जाने से पहले चप्पल बाहर ही उतार दें.

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साफ-सुथरी रसोई क्यों जरूरी है?

रसोई की सफाई सिर्फ आस्था की बात नहीं है, ये सेहत से भी जुड़ी है. साफ किचन का मतलब है कम बीमारियां और हेल्दी लाइफ. जब किचन साफ रहता है, चीजें अपनी जगह पर होती हैं और खाना बनाते समय सफाई का ध्यान रखा जाता है, तो घर का माहौल भी सकारात्मक और खुशहाल रहता है.

किचन के लिए कुछ और जरूरी वास्तु टिप्स

गैस चूल्हे की दिशा: किचन में चूल्हा हमेशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में होना चाहिए. खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है.

पानी और आग का संतुलन: सिंक (पानी) और गैस (आग) को पास-पास नहीं रखना चाहिए. इससे ऊर्जा का टकराव माना जाता है.

रसोई में रोशनी और हवा: किचन में अच्छी वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी होनी चाहिए. इससे पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है और बैक्टीरिया भी कम होते हैं.

टूटी-फूटी चीजें न रखें: किचन में टूटे बर्तन या खराब उपकरण न रखें. ये नेगेटिव एनर्जी को बढ़ाते हैं.

अनाज का सम्मान करें: अनाज को हमेशा साफ और ढके हुए डिब्बों में रखें. अन्न की बर्बादी से बचें, इसे वास्तु और धर्म दोनों में अशुभ माना गया है.

रात में बर्तन साफ रखें: रात को सोने से पहले बर्तन साफ कर लेना चाहिए. गंदे बर्तन छोड़ना नकारात्मकता को बढ़ाता है.

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