March Kharmas 2026: आज या कल, कब से शुरू होगा खरमास? जानें इस समय किन गलतियों से रहना होगा सावधान

March Kharmas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार 14 मार्च 2026 को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी. इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश और नए काम जैसे कई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. जानें खरमास कब से कब तक रहेगा और इस दौरान कौन-कौन से कार्य करने से बचना चाहिए.

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खरमास 2026 (Photo: ITG) खरमास 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

March Kharmas 2026: हिंदू पंचांग में खरमास को ऐसा समय माना जाता है जब कुछ शुभ और मांगलिक कार्य करने से परहेज किया जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश या नए काम की शुरुआत जैसे कार्यक्रम टाल दिए जाते हैं. ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही यह विशेष अवधि शुरू होती है. 

साल में दो बार लगता है खरमास

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पंचांग के मुताबिक, खरमास साल में दो बार आता है. पहला खरमास तब लगता है जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जो आमतौर पर दिसंबर-जनवरी में पड़ता है. वहीं दूसरा खरमास तब शुरू होता है जब सूर्य मीन राशि में जाते हैं, जो मार्च-अप्रैल के बीच पड़ता है. 

2026 में कब से लगेगा खरमास? (Kharmas 2026 Date)

साल 2026 में सूर्य देव 14 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसी समय से मीन संक्रांति का खरमास शुरू हो जाएगा. यह अवधि लगभग एक महीने तक रहेगी और 14 अप्रैल 2026 को समाप्त होगी. इस दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही खरमास खत्म माना जाएगा. 

क्या इस समय शादी-ब्याह किए जा सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान विवाह या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.  माना जाता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं, इसलिए लोग इन कार्यक्रमों को टाल देते हैं. 

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खरमास में किन कामों से बचना चाहिए?

-शादी-विवाह या सगाई जैसे मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश करना
-नया वाहन या संपत्ति खरीदना
-नामकरण संस्कार या मुंडन संस्कार
-नया व्यापार या बड़ा काम शुरू करना

खरमास में क्या करना शुभ माना जाता है? इस समय कुछ धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है. जैसे-

- सूर्य देव की पूजा और आराधना करना
- पवित्र नदियों में स्नान करना
- जरूरतमंदों को दान देना, खासकर जल का दान
- पितरों की शांति के लिए तर्पण या श्राद्ध करना

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