Kemdrum Yog: बड़ा भयंकर है केमद्रुम योग! अमीर को भी बना देता है फकीर

Kemdrum Yog: जब आपकी कुंडली में चंद्रमा से दूसरे और बाहरवें घर में कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है. केमद्रुम योग में राजा के यहां पैदा हुआ व्यक्ति भी रंक बन जाता है. यदि चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो केमुद्रम योग भंग हो जाता है.

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केमद्रुम योग का प्रभाव आर्थिक मोर्चे पर अधिक होता है. (Photo: Pixabay) केमद्रुम योग का प्रभाव आर्थिक मोर्चे पर अधिक होता है. (Photo: Pixabay)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:05 PM IST

केमद्रुम योग ऐसा योग है जो आपकी कुंडली में राजयोग का फल प्राप्त नहीं होने देता है. अच्छी तरह चल रहे जीवन में अचानक ऐसा झटका आता है कि व्यक्ति बुरी तरह टूट जाता है. आर्थिक मोर्चे पर इसका दुष्प्रभाव अधिक होता है. मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं, क्योंकि यह योग मन के कारक चंद्रमा को प्रभावित करता है. जो लोग योग साधना में रहते हैं या संत प्रवृत्ति के होते हैं और उन्हें भौतिक सुखों का मोह नहीं रहता है, उन पर इसका प्रभाव नहीं होता है. वह मन को साधना जानते हैं.

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कैसे बनता है केमद्रुम योग?
जब आपकी कुंडली में चंद्रमा से दूसरे और बाहरवें घर में कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है. केमद्रुम योग में राजा के यहां पैदा हुआ व्यक्ति भी रंक बन जाता है. कहते हैं कि चंद्रमा मन का कारक है जो शिशु अवस्था को दर्शाता है. कुंडली में यह योग हो तो शिशु को कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता है. इसमें हर वक्त किसी न किसी का सहयोग चाहिए. मन पर किसी ग्रह का प्रभाव न हो तो कार्यों में मन नहीं लगेगा. रुचि नहीं रहेगी. मन पर जिस ग्रह का प्रभाव होगा, रुचि भी उस ग्रह से संबंधित ही होगी.

कैसे भंग होता है केमद्रुम योग?
यदि चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो केमुद्रम योग भंग हो जाता है. चंद्रमा से केंद्र में (चंद्रमा से 4, 7, 10वें भाव में) कोई ग्रह बैठा हो तो भी केमद्रुम योग भंग हो जाता है.

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चंद्रमा के साथ ग्रह की युति को समागम कहा गया है. चंद्रमा जल का कारक है. इसमें गंगाजल मिलाएंगे तो गंगाजल बनेगा. और शराब मिलाएंगे तो शराब बन जाएगा. जिस ग्रह के साथ होगा, उसके गुणों को धारण कर उसका पोषण करेगा. चंद्रमा को मां का कारक भी माना गया है. जो ग्रह इसके साथ होगा, उसका पोषण करेगा.

पूर्ण रूप से केमद्रुम बहुत कम कुंडली में बनता है. इसका प्रभाव व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन, विद्या, बुद्धि, मानसिक शांति के मोर्चे पर नुकसान देता है. जीवनसाथी या संतान सुख नहीं मिल पाता. रोग-बीमारियां से राहत नहीं मिलती है. यह धनवान को भी कंगाल बना देता है. ज्यादातर लोग इसे धन से जोड़कर देखते हैं. हालांकि यह योग आध्यात्म से जुड़े लोगों के लिए अच्छा है. आपके लग्न का स्वामी 4, 8 12 में हो या नवम (धर्म भाव) में गुरु या शनि के होने से भी यह दोष कम हो जाता है.

अक्सर लोग आजीवन केमद्रुम योग से डरते रहते हैं. जबकि हर दूसरी या तीसरे कुंडली चंद्रमा से पीड़ित मिल ही जाता है. चंद्रमा केमद्रुम योग, विष योग, ग्रहण योग, नीच राशि में होकर किसी भी तरह से पीड़ित हो तो पूरी जिंदगी को अस्थिर कर देता है.

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