Hindu Nav Varsh 2026: 19 मार्च से शुरू होगा नव संवत्सर 2083, जानें कैसा पड़ेगा इसका देश-दुनिया पर असर

Hindu Nav Varsh 2026: 19 मार्च 2026 से हिंदू नववर्ष 2083 की शुरुआत होगी, जिसे रौद्र संवत्सर कहा जा रहा है. ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस साल राजनीति, अर्थव्यवस्था और मौसम पर इसका खास असर देखने को मिल सकता है. जानें नव संवत्सर 2083 से जुड़े संकेत और इसका महत्व.

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कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2026 (Photo: Pixabay) कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2026 (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:00 AM IST

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नए हिंदू वर्ष की शुरुआत होती है. साल 2026 में हिंदू नववर्ष 19 मार्च से आरंभ होगा. इस बार यह दिन गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए परंपरा के अनुसार, नव संवत्सर 2083 के राजा देवगुरु बृहस्पति माने जाएंगे. ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस नए वर्ष का नाम 'रौद्र' संवत्सर रखा गया है.

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हिंदू नववर्ष की शुरुआत को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर पूरे साल के हालात और संभावित घटनाओं के संकेत मिलते हैं. माना जा रहा है कि नव संवत्सर का प्रभाव देश-दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और मौसम तक पर भी दिखाई देगा. 

रौद्र संवत्सर का देश-दुनिया पर प्रभाव

ज्योतिषीय दृष्टि से रौद्र नाम का संवत्सर बहुत शांत नहीं माना जाता है. गणनाओं के मुताबिक, इस साल राजनीतिक और सामाजिक माहौल में तनाव देखने को मिल सकता है. कई देशों के बीच मतभेद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. सरकार और जनता के बीच भी कुछ मामलों को लेकर असहमति बढ़ सकती है. कुछ जगहों पर टकराव की स्थिति बनने के संकेत भी माने जा रहे हैं.

आर्थिक स्थिति पर असर

नव संवत्सर की शुरुआत के साथ ही चैत्र नवरात्र भी शुरू हो जाएगा. मान्यता है कि हर साल मां दुर्गा अलग-अलग सवारी पर आती हैं और उसी से सालभर की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है. इस बार गुरुवार को नववर्ष शुरू होने के कारण मां की सवारी पालकी मानी जा रही है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पालकी पर आगमन आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है. प्राकृतिक कारणों या अन्य परिस्थितियों के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जाती है.

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मौसम और प्राकृतिक स्थिति

भविष्यवाणी के अनुसार, इस वर्ष बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना बताई जा रही है. अगर मानसून कमजोर रहा तो खेती और फसलों पर भी इसका असर पड़ सकता है. सूखा या आग लगने जैसी घटनाएं बढ़ने की आशंका भी जताई जाती है. इसके अलावा भूकंप, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई क्षेत्रों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

चैत्र नवरात्र से ही क्यों शुरू होता है हिंदू नववर्ष?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी. इसी दिन से सतयुग की शुरुआत भी मानी जाती है. इसलिए, यह तिथि बेहद पवित्र और शुभ मानी जाती है. इसी कारण सम्राट विक्रमादित्य ने भी अपने पंचांग में इसी दिन से नए वर्ष की शुरुआत का प्रावधान किया था.

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